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मोटो
मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाईल 20 प्रतिशत डब्ल्यु.पी.

मोटो सल्फोनाइलयूरिया समूह का चुनिंदा अन्तःप्रवाही खरपतवारनाशी है। इसका पौधों द्वारा पत्तियों एवं जड़ दोनों के माध्यम से अवशोषण होता है। इसका उपयोग मुख्यतः चौड़ी पत्तियों वाली व जंगली पालक जैसी जिद्दी खरपतवारों के लिए किया जाता है। मोटो के प्रभाव से खरपतवारों में पौधों के लिए आवश्यक प्रोटीन बनने में रूकावट आती है।

उपयोग तालिका

प्रमुख फसलें नियंत्रित होने वाले खरपतवार

मात्रा
(प्रति एकड़)

विशेष

गेहूँ व जौ
 

 जंगली पालक,बथुआ, हिरनखुरी, कृष्णनील, चटरी-मटरी, सत्यानाशी, सेंजी आदि चौड़ी पत्तियों वाली खरपतवारें

 8 ग्राम
(एक यूनिट)

फसल बिजाई के 30 से 35 दिन बाद 100 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करें, सरसों व चना मिश्रित गेहूँ या जौ के खेत में व पास के खेत में ली गई चौड़ी पत्तियों वाली फसल होने पर इस रसायन का प्रयोग न करें

गन्ना

चौड़ी पत्ती वाली खरपतवारें

8 ग्राम
(एक यूनिट)

200 से 250 लीटर पानी में
मिला कर छिड़कें।

 

टिप्पणी

  • मोटो को आइसोवीर, वीटो, जैसे खरपतवारनाशी व कीटनाशक के साथ मिला कर प्रयोग किया जा सकता है। सकड़ी पत्ती वाली खरपतवारों के लिए वीजा व जेटो के प्रयोग के एक सप्ताह के अंतराल में मोटो का प्रयोग करें।
सावधानी
  • मोटो का असर भूमि में लम्बे समय तक रहता है अतः सनई, सूरजमुखी, मक्का आदि फसल चक्र वाले खेतों में इसका उपयोग मिट्टी में मिला कर नहीं करें। मोटो के छिड़काव के बाद स्प्रे पंप के साफ किए पानी को किसी पौधे या वृक्ष की जड़ों में न डाले।

मोटो से नियंत्रित होने वाली खरपतवारें

बथुआ कटीली पीत पापड़ा
जंगली पालक हिरण खुरी कृष्ण नील
उत्तम उत्पाद

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