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हेक्जावीर
हेक्जाकोनाजोल 5 प्रतिशत एस.सी.

हेक्जावीर अन्तःप्रवाही फफूंदनाशी है। इसका उपयोग फसल पर रोग की सम्भावना से पूर्व एतिहात के रूप में व रोग के लक्षण दिखने पर किया जाता है। हेक्जावीर का सक्रिय तत्व पत्तियों द्वारा उसके छिडकाव के बाद तुरंत अवशोषित हो कर सम्पूर्ण पौधें में शीघ्रता से फैलने के कारण इससे रोग की प्रभावी रोकथाम होती है। यह रोगकारक फफूंद की वृद्धि में सहायक अर्गोस्टेरोल नामक रसायन के निर्माण को अवरूद्ध कर उसे नष्ट कर देता है।

 
उपयोग तालिका
प्रमुख फसलें नियंत्रित होने वाले रोग मात्रा
(प्रति एकड़)
विशेष
धान सहसमारी या गर्दन  तोड (ब्लास्ट) व शीट ब्लाईट रोग  200 मि.ली. धान की रोपाई के 25 से 35 दिन  बाद या रोग के लक्षण दिखने 140 से 160 लीटर पानी में घोल कर छिडकें।
मूंगफली टिक्का रोग 200 मि.ली.  रोग के लक्षण दिखने पर 120 से 135 लीटर पानी में घोल कर 10 से 15 दिन के अंतराल में दो बार छिडके।
 
 
हेक्जावीर द्वारा नियन्त्रित रोग :

धान का सहसमारी रोग मूंगफली का टिक्का रोग सहसमारी रोग से नष्ट फसल
उत्तम उत्पाद

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