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वीरज़िम
कार्बन्डाझिम  50 प्रतिशत  डब्ल्यु.पी.

वीरजिम अन्तःप्रवाही फफूंदनाशक है। यह जड व भूमि से ऊपर वाले हरे भाग के उत्तको द्वारा अवशोषित हो समूचे पौधों में फैल सकता है। वीरज़िम, फफूंदों के बीजाणुओं के अंकुरण एवं उनके माईसिलिया के विकास को बाधित कर रोग की रोकथाम करता है। वीरजिम विभिन्न प्रकार के तना सडन, चूर्णी फफूंद, स्केब, एन्थ्रेक्नोज, पत्ती धब्बा आदि फसलों में हानिकारक रोगों के उपचार में प्रभावी है।

वीरजिम का उपयोग बीजोपचार एवं फ़सलो पर रोग के लक्षण देखाई देने की दोनों स्तिथियों में किया जा सकता है।

उपयोग तालिका -
प्रमुख फ़सलें नियंत्रित होने वाले रोग मात्रा
(प्रति एकड़)
विशेष
गेहूँ, व जौ खुली व बंद कंगियारी
करनाल बंट
- 2.5 से 3.0 ग्राम प्रति किलो बीज की
दर से बीजोपचार करे।
चना जड़ गलन - उपरोक्त
मटर, साग सब्जियो में
बीजोपचार के लिए
बीज जन्य रोग एवं जड़
गलन, बीज सड़न व
बीजांकुर गलन, कॉलर रॉट
- 2.5 से 3.0 ग्राम प्रति किलो बीज की
दर से बीजोपचार करे।
फल बृक्षों व मिर्च, टमाटर,
आदि एवं कद्दूवर्गीय
सब्जियों
जड़ गलन - 1 से 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में
घोल कर जड़ क्षेत्र में ड्रचिंग करें।
 
पौघ-शाला में बींजाकुर गलन  
आम एंथ्रेक्नोज व रॉट - 200 ग्राम प्रति 100 लीटर पानी में
घोल कर छिड़के ।
 
कद्दूवर्गीय सब्जियों चूर्णी फफूंद  
रिजका पत्ती धब्बा रोग  
धान शीथ ब्लाईट व शीथ रॉट
 
200 ग्राम 200 लीटर पानी में घोल कर छिड़के।
कपास पत्ती धब्बा रोग  150 ग्राम 150 लीटर पानी में घोल कर छिड़के।
मक्का भूरी पत्ता रोग 1 100-150 ग्राम फसल की अवस्था के अनुसार 100 से 150 लीटर पानी में घोलकर छिड़कें।
खरीफ दलहन व सोयाबीन  पत्ती धब्बा रोग, चूर्णी फफूंद 150 ग्राम 150 लीटर पानी में घोल कर छिड़के
मूंगफली टिक्का /  पत्ती धब्बा रोग 100 ग्राम 100 लीटर पानी में घोल कर छिड़कें।
खरीफ की विभिन्न फसलों में बीजोपचार बीज जन्य रोग एवं जड़ गलन, बीज सड़न व बीजांकुर गलन,कॉलर रॉट आदि भूमिगत फफूंद जन्य रोगों हेतु - 2.5 से 3.0 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीजोपचार करे।
 
 
वीरजिम द्वारा नियन्त्रित रोग :

धान में शीथ ब्लाइट रोग

धान में शीथ रॉट रोग सोयाबीन का चूर्णा फफूंद रोग
उत्तम उत्पाद

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