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जिंक
(जिंक सल्फेट मोनोहाइड्रेट - जिंक 33 प्रतिशत)
पौधों की सही बढ़वार और अधिक उपज के लिये ''जिंक तत्व'' अति आवश्यक है क्योंकि ''जिंक'' का पौधों की वृद्धि में सहायक अनेक एन्जाइमों को सक्रिय करने में विशेष महत्व है। कृषि वैज्ञानिक भरपूर व अच्छी पैदावार लेने के लिये एन.पी.केउर्वरकों के साथ-साथ जिंक सल्फेट का भी प्रयोग करने की लगातार सिफारिश कर रहे हैं। एन.पी.के. उर्वरकों के साथ जिंक सल्फेट के उपयोग से पौधों को संतुलित आहार मिलता है जिससे उपज बढ़ती है और कृषि आय में वृद्धि होती है। जिंक सल्फेट के प्रयोग से पैदावार में 20-25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी प्राप्त की जा सकती है जिससे जिंक सल्फेट पर लगने वाली अतिरिक्त लागत की तुलना में लगभग 4 से 7 गुणा अधिक लाभ हो सकता है।
 
उत्तम जिंक सल्फेट के प्रयोग विधि
  1. अन्तिम जुताई के समय खेत में बुरकाव द्वारा।
  2. बुआई, रोपाई के 20 से 25 दिन बाद टॉप ड्रेसिंग द्वारा।
  3. खड़ी फसल में छिड़काव द्वारा।
मात्रा प्रति एकड़
  1. अनाज वाली फसलों में 10 से 20 किलो।
  2. तिलहन, दलहन व सब्जियों में 6 से 8 किलो।
  3. आलू व गन्ना में 6 किलो।
  4. फलों में 70 से 100 ग्राम तक प्रति पेड़।
  5. फसल छिड़काव 0.3 प्रतिशत घोल कर।
 
उत्तम उत्पाद

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