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कैलरिच
कैल्शियम नाइट्रेट

कैलरिच (कैल्शियम नाइट्रेट) एक रसायनिक उर्वरक है जिसमें 15.5 प्रतिशत नाइट्रोजन (नाइट्रेट) तथा 18.8 प्रतिशत कैल्शियम (पानी में घुलनशील) होता है। कैलरिच का प्रयोग विभिन्न फसलों व मृदाओं में काफी प्रभावशाली पाया गया है। कैलरिच के प्रयोग से फसलों में बीमारियां कम लगती हैं तथा विपरीत मौसम का असर कम होता है। कैलरिच के प्रयोग से फसलों की गुणवत्ता में सुधार होता है। इसके प्रयोग से मृदा के भौतिक एवं रसायनिक गुणों में सुधार होता है।

कैल्शियम : यह तत्व कोशिकाओं की झिल्लियों और दीवारों का भाग है। यह कोशिकाओं के विभाजन, पौधे के बढ़वार जड़ों के विकास और एन्जाइमस्‌ को सक्रिय या निष्क्रिय करने में मदद करता है। इस की कमी के लक्षण सर्वप्रथम पौधे के बढ़ते हुए भाग पर नजर जाते हैं। इसकी कमी से पत्तियों का आकार छोटा रहता है, वह मुड जाती हैं, उनमें झुरियां पड जाती हैं और उनका रंग गहरा हरा हो जाता है। जड़ों की बढ़वार  में रूकावट आती है। मूंगफली में फलियां खाली रह जाती हैं या उनमें दाना छोटा बनाता है।

नाईट्रोजन : नाइट्रोजन पौधे के हरित पदार्थ और अन्य सभी प्रोटीन का भाग है। पौधे की पत्तियों और तने के गहरे हरे रंग, बढ़वार , फुटान पत्तियों की अधिकता और आकार के लिये यह जिम्मेदार है। नाइट्रोजन की कमी वाले पौधे की बढ़वार  रूक जाती है और रंग पीला पड ने लगता है। यह पीलापन अकसर निचली (पुरानी) पत्तियों पर दिखाई देता है, जबकि उपर की (नई) पत्तियां हरी रहती हैं क्योंकि नई पत्तियों में पुरानी पत्तियों से नाइट्रोजन पहुंचता रहता है। नाईट्रोजन की बहुत कमी होने पर पत्तियां भूरी होकर सूख जाती हैं व गिर जाती हैं। फसल की उपज और प्रोटीन की मात्रा में भारी कमी हो जाती है।

 
उपयोग तालिका
उपयोग विधि प्रयोग की मात्रा
बुआई के समय अन्य उर्वरकों के साथ मिलाकर प्रयोग करें। 10 किलोग्राम प्रति एकड़
खड़ी फसल में बुरकाव करें। 10 किलोग्राम प्रति एकड़
फल वृक्षों में अन्य उर्वरकों के साथ मिलाकर प्रयोग करें। 200-400 ग्राम प्रति फल वृक्ष
उत्तम उत्पाद

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