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मेटावीर
मेटावीर
मेट्रिबुज़िन 70 प्रतिशत डब्ल्यु.पी.

मेटावीर एक चुनिंदा अन्तःप्रवाही खरपतवरनाशी है। यह रसायन पौधों की पत्तियों व जड़ों द्वारा अवशोषित हो कर उनकी प्रकाश संश्लेषण की  क्रिया को बाधित करता है। इसका उपयोग गन्ना, आलू, आदि फसलों की घास कुल एवं चौड़ी पत्तियों वाली खरपतवारों को उनके उगने से पूर्व किया जाता है। मेटावीर के अच्छे परिणाम प्राप्त करने के लिए इसके प्रयोग के 2 सप्ताह के भीतर, प्रयोग के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए अन्यथा फव्वारा पद्धति से 6 से 12 मि.ली. तक सिंचाई दे। इसके प्रयोग के तुरंत बाद अत्यधिक वर्षा (12 मिली से अधिक) होने पर भी मुख्य फसल को हानि की संभावना रहती है।

उपयोग तालिका

प्रमुख फसलें  नियंत्रित होने वाले खरपतवार मात्रा
(प्रति एकड़ )
विशेष
गन्ना घास कुल व चौड़ी पत्तियों वाली खरपतवारे 800 ग्राम बिजाई के दो से तीन दिन बाद 225 लीटर पानी में घोल कर समान रूप से छिड़काव करें।
आलू उपरोक्त 100 ग्राम फसल बुआई के 2 से 3 दिन बाद 200 लीटर पानी मे घोलकर खेत में बनी नालियों पर छिड़कें।
 
सावधानिया

- मेटावीर का सरसों, व गोभी कुल की फसलों, ककड़ी व खरबूजा कुल की फसलों, पालक,सलाद, प्याज, लहसुन, चुकंदर, सूरजमुखी, सनई, तम्बाकू, शकरकंदी आदि फसलों पर दुःप्रभाव देखा गया है अतः इसका इन फसलों में खरपतवारों को नष्ट करने के लिए प्रयोग न करें।

- मेटावीर का फसल में छिड़काव करने के दौरान इसके घोल को लगातार हिलाते रहें तांकि खरपतवार नाशी की मात्रा समान रूप से फसल पर फैले।

 

मेटावीर से नियंत्रित होने वाली खरपतवारें

गाजरी पोआ घास भांग चटरी
उत्तम उत्पाद

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