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वीरकिल-80
2, 4 - डी, (सोडियम साल्ट) 80 डब्ल्यु.पीवीज
2, 4-डी एक पादप वृद्धि नियंत्रक आक्सिन का संश्लेषित चुनिंदा खरपतवारनाशी रसायन है। इसका उपयोग सकरी पत्तियों वाली फसलों में पनपने वाली चौड़ी पत्तियों वाली खरपतवारों की रोकथाम के लिए किया जाता है। इस रसायन का पौधों द्वारा अवशोषण किये जाने पर यह पौधों के बढ़वार वाले भागों तक पहु¡च जाता है जिससे कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि होने से पौधा मरने लगता है।

उपयोग तालिका

प्रमुख फसलें नियंत्रित होने वाले खरपतवार मात्रा
(प्रति एकड़ )
विशेष
गेहूँ व जौं बथुआ, हिरनखुरी,कृष्णनील, चटरी-मटरी, सत्यानाशी, सेंजी आदि चौडी पत्तियों वाली खरपतवारें 200 ग्राम
  1. फसल बिजाई के 30 से 45 दिन के मध्य छिड़काव करें।
  2. स्रासों व चना मिश्रित गेहूं या जौं के खेत में व पास के खेत में ली गई चौड़ी पत्तियों वाली फसल होने पर इस रसायन का छिड़काव न करें।
  3. गेहू¡ की प्रजाति पी.बी.डब्ल्यु-343 व अन्य 2, 4-डी के प्रति असहिष्णु किस्मों में इसका छिड़काव न करे।
गन्ना चौडी पत्ती वाली खरपतवारें 250  ग्राम  
 
गेहूं व जौं की फसल में सकरी व चौड़ी पत्तियों वाली खरपतवारों के सम्मिलित रोकथाम के लिए वीरकिल को आईसोवीर के साथ मिला कर प्रयोग किया जा सकता है किन्तु इस रसायन को वीज़ा (क्लोडिनाफॉप) और ज़ेटो (फिनाक्सीप्रॉप) के साथ मिला कर उपयोग नही करना चाहिऐ। सकरी व चौड़ी पत्तियों वाली दोनों प्रकार की खरपतवारों के नियंत्रण हेतु वीज़ा या ज़ेटो के एकल छिड़काव के 7 दिन बाद ही वीरकिल का छिड़काव करें।

सावधानी - वीरकिल की अत्यधिक अल्प मात्रा के प्रयोग से भी कपास की फसल में क्रेजी टॉप की विसंगति उत्पन्न होने लगती है जिसमें बढ़वार करने वाली पत्तियां व शाखाओं के सिरे व कोमल तने बेतरतीब मुड़ने लगते हैं व पत्तियां चमड़े के समान मोटी एवं भिण्डी के आकार की होने लगती है।

अत: 2, 4-डी किये हुये छिड़काव यंत्रो का दुबारा प्रयोग पूर्ण सफाई के बाद ही करें।
 
उत्तम उत्पाद

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