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फेबकोल
(प्रॉपिनेब 70 प्रतिशत डब्लू.पी.)
फेबकोल एक सम्पर्क एवं व्यापक प्रभावी पौध रोग निवारक फफूंदनाशी है। इसके प्रभाव से रोगकारक फफूंद के स्पोर नहीं उग पाते है एवं रोग का विस्तार रूक जाता है। यह रसायन आलू, टमाटर, मिर्च जैसी सब्जियों व अंगूर, अनार, सेव, आदि फल-वृक्षों के विभिन्न रोगों के निवारण हेतु प्रभावी है।

फेबकोल के फसल पर छिड़काव के बाद यह काफी समय तक पौधों में चिपका रहता है व वर्षा होने पर भी कम घुलता है। फेबकोल में उपस्थित जस्ता (जिंक) तत्व भी पौधों द्वारा अवशोषित होकर फसल की उपज वृद्धि में सहायक होता है।

उपयोग तालिका

प्रमुख फसलें नियंत्रित होने वाले खरपतवार मात्रा
(प्रति एकड़ )
विशेष
धान भूरा पत्ती धब्बा रोग 450-500 ग्राम 100 से 150 ली. पानी में घोल बनाकर छिड़के।
आलू अगेती व पिछेती झुलसा रोग 450-500 ग्राम 100 से 150 ली. पानी में घोल बनाकर छिड़के।  
मिर्च डाई बेक (शीर्ष गलन) 500-700 ग्राम 100 से 150 ली. पानी में घोल बनाकर छिड़के।  
अंगूर तुलासिता (डाउनी मिल्ड्यू) 300 ग्राम 100 से 150 ली. पानी में घोल बनाकर छिड़के।  
अनार पत्ती व फल धब्बा रोग 5300 ग्राम 100 से 150 ली. पानी में घोल बनाकर छिड़के।  
सेव स्केब रोग 300 ग्राम 100 से 150 ली. पानी में घोल बनाकर छिड़के।  
 

सावधानियां

  • सेव व अनार के बगीचों में फलों की तुड़ाई छिड़काव के 10 दिन बाद व अंगूर में 40 दिन बाद करें।
  • सब्जियों में फेबकोल के प्रयोग के 10 दिन बाद तुड़ाई करें।
 
उत्तम उत्पाद

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