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माह - जनवरी

  गेहूँ / जौ  चना  सरसों  प्याज़
आलू बैंगन टमाटर फूल गोभी

गेहूँ

पिछेती गेहूँ में, बुवाई के 20-25 दिन बाद पहली सिंचाई की व्यवस्था करें। सिंचाई के साथ-साथ नाइट्रोजन की बची हुई मात्रा का भी छिड़काव करें। गेहूँ में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के अतिरिक्त मंडूसी या कनकी तथा जंगली जई का भी अधिक प्रकोप होता है। इन खरपतवारों के नियन्त्रण के लिये बुवाई के 30-35 दिन तक खरपतवारनाशी दवाई का प्रयोग किया जा सकता है। गेहूँ के जिन खेतों में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार ही हों, वहाँ किसान भाई, 1250 ग्रा० 2,4-डी सोडियम साल्ट (80%) या 1.5 लीटर, 2,4-डी एस्टर ( 34.6%) प्रति हेक्टेअर की दर से 600 लीटर पानी में मिलाकर बुवाई के 28-30 दिन बाद छिड़काव करें। जहाँ घास की जाति के - जैसे कि गेहूँ का मामा -  का ज्यादा प्रकोप हो किसान भाई मैंथाबेज़थायज़ुरान 70% घु०पा० ( टिबुलिन) 2 कि०ग्रा० प्रति हैक्टेअर या आइसोप्रोटुरॉन 75% घु०पा० 1.250 कि०ग्रा० प्रति हेक्टेअर की दर से 700 लीटर पानी में मिला कर बुवाई के लगभग 30 दिन बाद छिड़काव करें। जहाँ दोनो प्रकार के खरपतवार हों वहाँ पर आइसोप्रोटुरॉन व 2,4- डी के मिश्रण का छिड़काव करें। यह मिश्रण छिड़काव से पहले तैयार करें। गेहूँ में पहली सिंचाई के बाद 20-25 दिन के अन्तर पर सिंचाई करें। पानी की कमी की अवस्था में फुटाव, बाली निकलने और दाना बनते समय सिंचाई अवश्य करें। भूरा या पत्तों के रतुआ रोग का प्रकोप हो तो 2 कि०ग्रा० जिनेब प्रति हेक्टेअर 625 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

चना

चने की फ़सल में फलीबेधक कीड़ा जिसकी गिडारें हल्के हरें रंग की होती हैं जो बाद में भूरे रंग की हो जाती हैं। ये फलियों को छेदकर अपने सिर को फलियों के अन्दर डाल कर दानों को खा जाती हैं। इसकी रोकथाम के लिये फली बनना प्रारम्भ होते ही फ़ेनवेलरेट 20 ई०सी० की 500 मि०ली० या मोनोक्रोटोफ़ॉस 36 ई०सी० की 750 मि०ली० मात्रा 600 से 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेअर खेत में छिड़काव करें। फ़सल में पहला छिड़काव 50% फूल आने के बाद करें। यदि छिड़काव के लिये रसायन उपलब्ध नहीं हो तो मिथाइल पॅराथियान 2% धूल की 25 कि०ग्रा० मात्रा का बुरकाव करें।

सरसों

सरसों में फली बनने की अवस्था में अगर ज़मीन में पानी की कमी हो तो उपज में 20 से 30% की कमी आ जाती है। अतः यह ज़रूरी है कि किसान भाई उस अवस्था पर फ़सल की सिंचाई अवश्य करें। सरसों की अगेती फ़सल में पक्षियों का भी अधिक प्रकोप होता है, अतः फ़सल को पक्षियों से बचाना भी ज़रूरी है।

 

 

प्याज़

प्याज़  की रोपाई का काम भी किसान भाई इस महिने समाप्त कर लें। जिस खेत में प्याज़ की रोपाई करना चाहते हों उसकी 2-3 बार जुताई करके पाटा चलाकर समतल कर लें। यदि मिट्टी की जाँच उपलब्ध न हों, तो रोपाई से 15- 20 दिन पहले 20-25 टन गोबर की सडी हुई खाद डालें व रोपाई के समय 50 कि०ग्रा० नाइट्रोजन , 50 कि०ग्रा० फॉस्फोरस एवं 80-100 कि०ग्रा० पोटाश मिट्टी में मिलाए। अब तैयार खेत में लाईन से लाईन की दूरी 15 से०मी० एवं पौधे से पौधे के बीच की दूरी 10 से०मी० रखते हुये 2 सें०मी० की गहराई पर रोपाई कर दें। रोपाई के समय खेत में नमी बनाये रखें एवं 3-4 बार हल्की सिंचाई करें।

आलू (बीज की फ़सल)

इस फ़सल में जनवरी के प्रथम सप्ताह तक हर हालत में पौधों के ऊपरी भाग ( डंठल) को काट दें, उसके बाद आलू को २०-२५ दिन तक ज़मीन के अन्दर ही पड़े रहने दें। ऐसा करने से आलू का छिलका कड़ा हो जायेगा और ख़राब नहीं होगा। २० से २५ दिन बाद खुदाई करके आलुओं का वर्गीकरण करें। बीज के लिये 40 से 50 ग्रा. के साफ-सुथरे कन्दों का चयन करें और नई बोरियों में भर कर भण्डारण के लिये शीतगृहों में भेज दें।

बैंगन व टमाटर

जिन किसान भाइयों ने वसंत-ग्रीष्म की फ़सल के लिये बैंगन और टमाटर की पौध लगा रखी है, वे किसान भाई जनवरी के अन्त तक इसकी रोपाई कर दें परन्तु रोपाई से पहले यह देख लें कि आगे आने वाले समय में पाले का भय न हो। खेत की तैयारी के समय 20-25 टन गोबर की सड़ी खाद मिट्टी में अच्छी तरह मिला लेनी चाहिये। इसके साथ-साथ 30 से 40 कि. ग्रा. नाइट्रोजन, 60 कि. ग्रा. फ़ॉस्फ़रस और 50 कि. ग्रा. पोटाश का इस्तेमाल करें। बची हुई नाइट्रोजन का 30 से 40 कि. ग्रा. रोपाई के 3 सप्ताह बाद और बाकी 30-40 कि. ग्रा. उसके 4 सप्ताह बाद दें। रोपाई के तुरन्त बाद पहली सिंचाई करें, इसके बाद 8 से 10 दिन बाद सिंचाई करें। जिन किसान भाइयों ने टमाटर और बैंगन की शरद मौसम की फ़सल लगा रखी है, वे अच्छी गुणवत्ता और क़ीमत के लिये समय पर फलों की तुडाई करें। अगर टमाटर को दूसरे स्थानों पर ले जाना है, तो फल की तुडाई टमाटर लाल होने से पहले ही कर लें। स्थानीय बिक्री के लिये लाल पके हुये टमाटरों को तोड़ें । बैंगन में फल तब तोड़े जाने चाहिये जब वे मुलायम हों और उनमें ज़्यादा बीज न बने हों।
 

फूल गोभी

फूल गोभी के फूल उस समय काटने चाहिये जब वे ठोस, सफ़ेद व धब्बे रहित बिलकुल साफ हों । फूल तेज धार वाले चाकू से काटे जाएँ और फूल के साथ पत्तियों के कम से कम दो चक्र भी हों । पत्तियों के ऊपरी चक्र में काफी पोषक तत्व होते हैं। अतः उनको भी फूल के साथ उपयोग करना चाहिये । बंद गोभी को तब काटें जब वह बंधी और कोमल हो। यदि कटाई में देर हो गई तो गांठें फट सकती हैं। कटाई करते समय दो तीन बाहरी पत्तियाँ रखें जिससे बाजार ले जाते समय गांठे खराब न हों।
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