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माह - अगस्त

 सोयाबीन  ज्वार  बाजरा  धान  मक्का  तिल
   
सोयाबीन
सोयाबीन में यदि खरपात नाशक का प्रयोग नहीं किया गया हो तो पहली निराई-गुड़ाई बुआई से 20-25 दिन की फ़सल पर व दूसरी 40-45 दिन की फ़सल पर करे।
ज्वार
खेत को खरपतवार रहित रखें। निराई-गुड़ाई करते समय ध्यान रहें कि फ़सल के पौधों को हानि न पहुचें। यदि बुआई से पूर्व 500 ग्राम प्रति हेक्टेअर खेत में छिड़का गया हो तो फ़सल में खरपतवार नहीं होगे। नाइट्रोजन की शेष आधी मात्रा बुआई के एक माह बाद देखें। हरे चारे के लिए बोई गई चरी की प्रथम कटाई सिट्टा निकालते समय करें।
बाजरा
बाजरे मे नाइट्रोजन शेष आधी मात्रा बुआई के 30 दिन बाद वर्षा होने वाले दिन दें। फ़सल में निराई-गुड़ाई समय समय पर करें। गुड़ाई 5 से०मी० से अधिक गहरी नहीं करें।
धान
देरी से बोए जाने वाले धान को रोपा अगस्त के प्रथम सप्ताह तक अवश्य करें। उचित तो यह  है कि रोपण कार्य जुलाई के मध्य किया जाए। क़तार से क़तार की दूरी 20 से०मी० व पौंधे से पौंधे की दूरी 10 से०मी० रखें।
सम्पूर्ण फ़ॉस्फ़रस व पोटास तथा नाइट्रोजन की आधी मात्रा आखिरी गारे के समय दें। जस्ते की कमी को दो वर्ष में एक बार २५ किलो जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेअर डालें।  
मक्का
फ़सल में बढवार के समय तथा मांजरे निकलते समय पर्याप्त नमी होना आवश्यक है अतः यदि वर्षा न हो तो इन अवस्थाओं पर सिंचाई करें। नाइट्रोजन की दूसरी मात्रा बुआई के बाद देंखें तथा तीसरी मात्रा मांजरे निकलने से पूर्व देखे। फ़सल मे समय-समय पर निराई गुड़ाई करें।
तिल
नाइट्रोजन की शेष आधी मात्रा अर्थात्‌10 किलो प्रति हेक्टेअर, बुआई के 4-5 सप्ताह बाद दें तथा जिन खेतो में जस्ते की कमी हो तो 50 दिन की फ़सल पर 0.25 % चूने के पानी का घोल बनाकर छिड़काव करें। बुआई के 30 दिन बाद फ़सल में निराई गुड़ाई भी करें।
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