पीछे

back
पौध संरक्षण कार्यमाला   माह

माह - सितम्बर

 मक्का  ज्वार  धान  सोयाबीन  मूंगफली
मक्का

मक्का देरी से बोई गई फ़सल में मांजरे (फूल) निकलते समय नाइट्रोजन की शेष मात्रा फ़सल में दें। तथा पौधों पर मिट्टी चढ़ा दें। यदि इस समय वर्षा नहीं हो तो सिंचाई करना आवश्यक है।

ज्वार

ज्वार की फ़सल में सिट्टे आते समय नमी पर्याप्त होना आवश्यक है; यदि वर्षा नही हो तो सिंचाई का प्रबन्ध करें। देशी ज्वार में असिंचित (वर्षा आधारित फ़सल) में गुड़ाई कर नमी का संरक्षण करें।

धान

कई क्षेत्रो में मानसून की वर्षा देरी से होने के कारण धान फ़सल की रोपाई देरी से की जाती है। रोपाई के 30-35 दिन बाद नाइट्रोजन की शेष आधी मात्रा दें। अधिक उपज देने वाली क़िस्मों में यह मात्रा 50 से 60 किलो प्रति हेक्टेअर तथा खुशबूदार बोनी किस्मो के लिये 45 किलो तथा उची बढ़ने वाली बांसमती क़िस्मों में 30 किलो / हेक्टेअर दें। नील हरित काई 15 किलो / हेक्टेअर रोपाई के 7-10 दिन बाद देने से / हेक्टेअर 20 किलो नाइट्रोजन की बचत की जा सकती है। जस्ते की कमी के लक्षण यदि फ़सल पर दिखाई दे तो 0.5% ज़िंक सल्फ़ेट का पर्णीय छिड़काव करें। यदि भूमि में 25 किलो जिप्सम दो वर्ष में एक बार दिया गया हो तो जिप्सम की कमी नहीं रहती।

सोयाबीन

कई क्षेत्रों में वर्षा आधारित फ़सल ली जाती है तथा कुछ क्षेत्रों में सिंचित फ़सल भी ली जाती हैं इसमें फूल आते समय व फलियाँ बनते समय नमी होना अच्छे उत्पादन के लिये ज़रूरी है। अतः आवश्यकतानुसार सिंचाई करें। फूल झड़ने की समस्या हो तो फूल आते समय सोयाबूस्टर 250 मिली लीटर या ब्रासिनो स्टियरॉइड 0.25 ग्राम साइटोकाइमिन 2.5 ग्राम को 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

मूंगफली

मूंगफली में फलियाँ बनने की तथा दाना भरने की अवस्था होगी, अतः कृषक कृषि क्रियाऐं नही करें। पोलिया रोग की शिकायत हो तो हराकसीस 0.5% या गंधक का अम्ल 0.1% का घोल 500 लीटर पानी में बनाकर छिड़काव करें।

अस्वीकरण   | कॉपीराइट © 2011 चम्बल फर्टिलाइजर्स एण्ड केमिकल्स लिमिटेड | सर्वश्रेष्ठ अवलोकन हेतू 1024 x 768 पर देखे