पीछे

back
New Page 1

माह - अक्टूबर

सब्जियाँ
 आलू  प्याज  फुलगोभी  पत्तागोभी  बैगन  टमाटर  मिर्च  मटर
आलू

इसकी बुआई अक्टूबर के अन्त तक करें। कुछ क्षेत्रों जैसे कोटा व मालवा के जिलों में बुआई नवम्बर के प्रथ्म सप्ताह तक भी की जा सकती है। बीज 2.5 से०मी० व्यास का 25-30 ग्राम वजन के लगभग 25-30 क्विंटल/ हेक्टेअर की आवश्यकता होगी। बीजों को बुआई से पूर्व थायोफ़ेनेट मिथाइल 0.2 % या कार्बोन्डाज़िम 0.1% के घोल में डूबोकर उपचारित करें तथा एसिटोबॅक्टर कल्चर से इसके बाद उपचारित कर बुआई करें। बुआई पूर्व 250-300 क्विं० गोबर की खाद 60-75 किलो नाइट्रोजन, 80-100 किलो फ़ॉस्फ़रस तथा 80-100 किलो पोटाश दें।

प्याज

रबी की फ़सल के लिये नर्सरी तैयार करें। प्याज लाल, सफ़ेद या पर्पल रंग की क़िस्मों की बुआई कर सकते हैं। सफ़ेद क़िस्मों मे पूसा व राउन्ड ,पंजाब सफ़ेद, पंजाब 48, उदयपुर 102 लाल क़िस्मों में नासिक रेड, रोजा, एग्रीफाउड डार्क रेडलाईट रेड, अर्का कल्याण, एन-53 आदि उपयुक्त हैं।

रबी की फ़सल के लिये अक्टूबर-नवम्बर में एक हेक्टेअर की फ़सल के लिये 10 किलो बीज पर्याप्त होता है। यदि खरपतवारों की समस्या हो तो अंकुरण से पूर्व 2 किलो एलाक्लोर, सक्रिय तत्व छिड़के या बुआई से पूर्व 1 किलो सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेअर छिड़काव करें अन्यथा बीजों को बोकर उसके उपर बारीक भुरभुरी देशी खाद व मिट्टी व सूखी घास से ढक दें। अंकुरण होने के बाद सूखी घास हटा दें। कंदों से भी बुआई की जा सकती है किन्तु इसके लिये 10 क्विं० प्रति हेक्टेअर लगाते हैं।

रबी की फसल के लिये अक्टूबर-नवम्बर में एक हेक्टेयर की फसल के लिये 10 किलो बीज पर्याप्त होता है। यदि खरपतवारों की समस्या हो तो अंकुरण से पूर्व 2 किलो एलाक्लोर, सक्रिय तत्व छिड़के या बुवाई से पूर्व 1 किलो सक्रिय तत्व प्रति हेक्टर छिडकाव करें अन्यथा बीजो को बोकर उसके उपर बारीक भुरभुरी देशी खाद व मिट्टी व सूखी घास से ढंक दें। अकुरण होने के बाद सूखी घास हटा दें। कंदों से भी बुवाई की जा सकती है किन्तु इसके लिये 10 क्विं. प्रति हेक्टर लगाते है।

 
फूलगोभी,पत्तागोभी

अगेती किस्मो की तैयार पौध को 60 X 45 से०मी० की दूरी पर तथा फूलगोभी की पिछेती क़िस्मों की तैयार पौध को 60 X 45 से०मी० की दूरी पर लगाएँ। पौध लगाने से पूर्व 250-300 क्विं० गोबर की खाद, नाइट्रोजन 60-75 किलो, फ़ॉस्फ़रस 80 किलो तथा पोटाश 60-80 किलो प्रति हेक्टेअर डालें।

बैगन,टमाटर मिर्च
आवश्यकतानुसार निराइ, गुड़ाई, सिंचाई कार्य करें। तैयार फलों को समय पर तोड़ कर बिक्री हेतु भेजें।
मटर
अगेती क़िस्म के पोधों के बढ़ौत्तरी का समय है अतः समय पर सिंचाई करें। भारी मिट्टी में 1 या 2 सिंचाईयाँ ही पर्याप्त होती हैं जबकि हल्की मिट्टी में 8-10 दिन के अन्तराल पर या आवश्यकतानुसार सिंचाई करें।
अस्वीकरण   | कॉपीराइट © 2011 चम्बल फर्टिलाइजर्स एण्ड केमिकल्स लिमिटेड | सर्वश्रेष्ठ अवलोकन हेतू 1024 x 768 पर देखे