पीछे

back
New Page 1

माह -  नवम्बर

नवम्बर  में अधिकांश ख़रीफ़ फ़सलों की कटाई हो चुकी होती है। जो फ़सल अक्टूबर अंत तक न पक पाए (जैसे धान की पछेती जातियाँ) उनके कटाई के 10 दिन पूर्व ही पानी लगा देना चाहिए, जिससे कटाई के तुरंत बाद खेत में जुताई हो जाए व रबी की फ़सल अधिक न पिछड़ पाए। विभिन्न फ़सलों में खेत की तैयारी मृदा प्रकार, बीज, जल की उपलब्धता एवं बोयी जाने वाली प्रजातियों पर निर्भर करता है।

गेहूं दलहन ( चना मटर एवं मसूर)
गेहूं

वर्षा आधारित क्षेत्र में ख़रीफ़ फ़सल की कटाई के तुरंत बाद एक गहरी जुताई एवं दो बार हैरो या देशी हल से जुताई करना चाहिए, उसके बाद पाटा चलाएँ जिससे मिट्टी पर्याप्त मात्रा में भुरभुरी हो जाए एवं जल का नुकसान कम से कम हो सके।

फ़सल की बुआई अक्टूबर अंत तक या नवम्बर के प्रथम सप्ताह तक अवश्य कर देनी चाहिए।
बीज की बुआई से पूर्व विटावेक्स नामक फफूंद नाशक से 3 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करना चाहिए, जिससे विभिन्न फफूंदजनित बीमारियों से वे सुरक्षित हो जाएँ।

समय पर बोनी करने पर बीज दर 100 कि०ग्रा० प्रति हेक्टेअर एवं 20 से 22.5 सेंमी. कतारों के बीच की दूरी रखें।

पौध पोषण की उपयुक्त मात्रा देने उपज में आशातीत बढ़ौत्तरी की जा सकती है। इस हेतु 60 कि०ग्रा० नाइट्रोजन एवं 30 कि०ग्रा० स्फुर प्रति हे. की दर से दें। स्फुर की सम्पूर्ण मात्रा व नाइट्रोजन की आधी मात्रा बोनी के समय दें। नाइट्रोजन की शेष मात्रा बोनी के 25 से 35 दिन बाद प्रथम सिंचाई पश्चात या मृदा में नमी की उपलब्धता के हिसाब से दें। असिंचित अवस्था में उर्वरक की संपूर्ण मात्रा बुआई के समय ही देना चाहिए।

दलहन (चना मटर एवं मसूर)

ख़रीफ़ फ़सल की कटाई के तुरंत बाद वर्षा आधारित दलहनी फ़सलों के लिए एक गहरी जुताई करें, उसके बाद एक बार पाटा चला दें, जिससे मिट्टी भुरभुरी हो जाये। चने की बोनी के लिए पाटा आवश्यक नहीं है। केवल एक बार गहरी जुताई एवं दूसरी साधारण जुताई से खेत तैयार हो जाता है।

फ़सल को अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में बोनी करने का प्रयास करना चाहिए। ख़रीफ़ फ़सल की कटाई में देरी होने पर नवम्बर प्रथम सप्ताह तक बोनी की जा सकती है।

अस्वीकरण   | कॉपीराइट © 2011 चम्बल फर्टिलाइजर्स एण्ड केमिकल्स लिमिटेड | सर्वश्रेष्ठ अवलोकन हेतू 1024 x 768 पर देखे