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माह - जनवरी

फ़सल  कीट/व्याधि  हानि के लक्षण रोकथाम/नियंत्रण
 गेहूँ / जौ   ᅠमकड़ी, मांहू, तैला इनका प्रकोप मध्य दिसम्बर से शुरु हो जाता है।
पत्तियों का रस चूसकर ये फ़सल को कमजोर का देते है।
 
फार्मोथियान 25 ई.सी. या क्सी डिमेटोन मिथाइल 25 ई.सी. या डाइमेथोएट 30 ई.सी. 1 मि०लि० या फ़ॉस्फ़ोमिडॉन 85 प्रतिशत 0.25 से 0.3 मि०लि० प्रति लीटर पानी में छिड़कें ।
जड का मांहू / मोयला यह कीट जड़ों का रस चूसता है जिससे पौधे पीले पड जाते हैं। फ़ॉस्फ़ोमिडॉन 85 प्रतिशत 0.25 से 0.3 मि०लि० प्रति लीटर पानी में घोलकर जड़ों के आसपास घोल का छिड़काव करें।
  अनावृत कण्डवा बालियों में दानों के स्थान पर काला पाउडर बन जाता है। रोगग्रस्त पौधो को पोलीथीन थैली से कर जला दें ताकि काला पाउडर फ़सल/भूमि को प्रभावित नहीं कर सकें।
क्षुलसा व पत्ती धब्बा रोग इससे पत्तियों पर धब्बे पड जाते है तथा बाद में फ़सल कमजोर हो जाती है। जनवरी के प्रारम्भ से ही मेंकोजेब 2 ग्राम या कॉपर ऑक्सिक्लोराइड 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़कें । आवश्यकतानुसार छिड़काव 3-4 बार करें।
चना

 

 

फली छेदक हरे रंग की सवा इंच तक लम्बी व 0.25 इंच मोटाई तक बढ़ने वाली इल्लियाँ चने के दानों को खा जाती हैं। मेलाथियान 50 ई०सी० या 1.25 लीटर क्यूनालफॉस 25 ई०सी० या मोनोक्रोटोफॉस 36 एस.एल. 1 लीटर या फोजेलॉन 1875 मि०लि० या साइपरमेथ्रिन 25 ई०सी० 200-400 मि०लि० या डेकामेथ्रिन 400-500 मि०लि० प्रति हेक्टर का छिड़काव करें। नीम की पत्ती के रस का 10% घोल या नीम आधारित कीटनाशकᅠ3-4 लीटर/हेक्टर छिड़काव करें।
  क्षुलसा रोग पत्तियॉं, तने, फलियों पर छोटे भूरे रंग के धब्बे हो जाते है। प्रकोप बढ़ने पर तना व डंठल टूटकर झुक जाते है। मेंकाजेब 2 ग्राम या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 3 ग्राम या घुलनशील सल्फ़र 2 ग्राम या क्लोरोथेलोनिल 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकरᅠ छिड़कें।
सरसों

 

क्षुलसा, तुलासिता एवं सफ़ेद रोली इससे पत्तियों पर धब्बे पड़ते हैं, तने व फलियों पर भी धब्बे पड़ते है। सफ़ेद रोली में फलियाँ मोटी होकर दाने रहित हो जाती है। मेंकोजेब 64 प्रतिशत मेटालेक्जिल 8 प्रतिशत ; 72 प्रतिशत डब्ल्यू०पी० 2.5 किलो प्रति हेक्टेअर पानी में घोलकर छिड़कें।
मांहू /चेपा/मोयला यह कीट फलियों व दानों का रस चूस लेती है, जिससे पैदावार कम हो जाती है। डायमेथोएट 30 ई०सी० या मेलाथियान 50 ई०सी० या फार्मोथियान 25 ई०सी० 875 मि०लि० या क्लोरपाइरीफॉस 20 ई०सी० 600 मि०लि० या कार्बारिल 50 प्रतिशत डब्ल्यू० पी० 2.5 किलो प्रति हैक्टर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
अलसी

 

छाछ्या / भभूतिया
(पावडरी मिल्ड्यू)
पत्तियों/कलियों/कॅप्स्यूल पर सफ़ेद पाउडर जैसा छा जाता है, जिससे उत्पादन कम होता है।  घुलनयुक्त गंधक 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़कें
कुसुम मांहू/मोयला/चेपा यह पत्तियों कोमल टहनियों, फलों का रस चूसती है।  इसी कीट के लिये सरसों में बताये गये कीटनाशकों का उपचार करें।
मटर

 

फली छेदक यह कीट पत्तियों एवं दानों को खाता है। मोनोक्रोटोफॉस 36 एस. एल. 500 मि०लि० या क्यूनालफॉस 25 ई0सी0 1 लीटर प्रति हैक्टेअर पानी में घोलकर छिड़काव  करें।
छाछ्या/भभूमिया रोग पत्तियों, फलियों पर सफेद कवक लग जाने से उत्पादन गिर जाता है। सल्फ़र  डस्ट 25 किलो प्रति हैक्टेअर या डाइनोकेप 48 प्रतिशत ई0सी0 750 मि०लि० या घुलनयुक्त सल्फ़र  2.5 किलो प्रति हैक्टेअर को पानी में घोलकर छिड़काव  करें।
ईसबगोल मांहू/मोयला/चेंपा यह पत्तियों, नरम बालियों का रस चूस लेता है। इसी कीट के लिये सरसों में बताये गये रसायनों का प्रयोग करें।
अफ़ीम

 

काली मस्सी ( रोमिल फफूंद ) इससे पत्तियॉं, सिकुड़ जाती है, इसे कोडिया रोग भी कहते हैं। मेंकोजेब 64 प्रतिशत मेटालेक्जिल 8 प्रतिशत 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर 30, 50 व 70 दिन की फ़सल पर छिड़काव  करें।
डोडा इल्ली पंखुड़ियाँ झड़ते ही यह इल्ली डोडे पर लगती है जो बाद में दाने खा जाती है। कार्बोरिल 5 प्रतिशत या क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत 25 किलो हैक्टेअर या क्यूनालफॉस 25 ई.सी. 1 लीटर या मेलाथियान 50 ई.सी. 1.25 लीटर
बैंगन, टमाटर झुलसा रोग पत्तियों पर गहरे भूरे धब्बे पड़ जाने से फ़सल कमज़ोर हो जाती है। केप्टान 50 प्रतिशत 2 ग्राम या कार्बेण्डाजिम 1 ग्राम या मेंकोजेब या जाइनेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़कें।
बैंगन, मिर्च, भिंडी सफेद मक्खी थ्रिप्स,सूक्ष्म मकडी यह कीट पत्तियों व कोमल टहनियों का रस चूसते हैं जिससे फ़सल कमज़ोर हो जाती है। ऑक्सीडिमेटोन मिथाइल 25 ई. सी. या डाईमेथोएट 30 ई. सी. 1 मि. ली. या फ़ॉस्फ़मिडान 85 प्रतिशत एस. एल. 0.3 मि. ली. या इमीडेक्लोप्रिड 0.1 से 0.125 मि. ली. प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
टमाटर, मिर्च विषाणु रोग पत्तियाँ सिकुड़ जाती हैं, माथा बंध जाता है। फ़सल कमज़ोर हो जाती है। मोनोक्रोटोफॉस 36 एस. एल. या डाइमेथोएट 1 मि. ली. या एसीफेट 75 प्रतिशत 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
बैंगन,टमाटर, कुष्माण्ड कुल की सब्ज़ियाँ झुलसा रोग पत्तियों पर गहरे भूरे रंग के धब्बे पड़ने से पत्तियाँ सूखने लगती हैं। मेंकोजेब या जाइनेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़कें।
जीरा, सौंफ,धनिया मांहू/मोयला/चेंपा कोमल भागों का रस चूसते हैं जिससे फ़सल कमज़ोर हो जाती है। डाइमेथोएट 30 ई. सी. या मोनोक्रोटोफॉस 36 एस. एल. 1 मि. ली. या फ़ास्फ़मिडान 85 एस. एल. 0.5 मि.ली. / ली. पानी में घोलकर छिड़कें।
लहसुन अंगमारी व तुलासिता रोग पत्तियों पर पीले -पीले धब्बे पड़ जाते हैं। पत्तियाँ सूखने लगती हैं। मेंकोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर या मेंकोजेब 64 प्रतिशत मेटालेक्जिल 8 प्रतिशत 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़कें।
धनिया झुलसा रोग  तना व पत्तियों पर गहरे भूरे रंग के धब्बे पड़ जाते हैं जिससे दाने कम बनते हैं।  मेंकोजेब 2 ग्राम या बेनोमिल 1ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़कें।
  लोंगिया रोग तने व पत्तियों पर फफोले जैसे पड़ते हैं, बाद में दाने लोंग के जैसे लम्बे हो जाते हैं। टाइडेमार्फ 80 प्रतिशत 0.5 मि. ली. या बेनोमिल 1 ग्राम या हेक्साकोनाजोल 5 प्रतिशत ई. सी. 2 मि. ली. या डोडीन 65 प्रतिशत डब्लू. पी. 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़कें।
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