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माह - दिसम्बर

 गेहूं  जौ  चना  सरसों  मसूर
गेहूं

देरी से बोये जाने वाले गेहूं की बुआई का कार्य सम्पन्न करें। इसके लिये राज, 3077 लोक 1, राज.821,राज.2184, 1482, एच.डी. 2285,2236, जी. डब्ल्यू. 173, डब्ल्यू एच 147 क़िस्मों की बुआई करें। बीज को बुआई से पूर्व 2 ग्राम कार्बोविसन (वीटा वेक्स) या कार्बेण्डाजिम प्रति किलो बीज में मिलाकर उपचारित करें।

समय पर बोये गये गेहूं में शीर्ष जड़ों के बनने के समय ( 21 से 28 दिन के अन्दर) (लम्बी बढने वाली क़िस्मों में 40-50 दिन के मध्य) सिंचाई करें। चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के लिय 2,4-डी एस्टर सॉल्ट 500 ग्राम या 2,4-डी एमाइन सॉल्ट 750 ग्राम, सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेअर 500 से 700 लीटर पानी मे मिलाकर छिड़काव करें। जंगली जई व फेलेरिस माइनर की समस्या हो तो आइसोप्रोटूरॉन या मेटाक्सिरॉन भारी मिट्टी में 1.25 किलो तथा हल्की मिट्टी में 0.75 किलो सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेअर का छिड़काव करें।

जौ

इसकी देरी से बुआई के लिये मध्य दिसम्बर तक आर. एस.-6, आर. डी. 103, क़िस्में बोई जा सकती हैं। इसके लिये बीज उपचार गेहूं में बताये अनुसार करें। समय पर बोई गई फ़सल में सिंचाई करें तथा नाइट्रोजन की शेष आधी मात्रा पहली/दूसरी सिंचाई पर (भूमि की क़िस्म अनुसार) दें। आवश्यकतानुसार निराई गुड़ाई करें।
 

चना
धान की फसल काटने के बाद चने की बुवाई की जाती सकती है। चम्बल नहरों द्वारा सिंचित या अन्य परियोजनाओं की नहरों द्वारा सिंचित या भूमि में धान की कटाई के बाद सीधे ही चने की बुवाई की जा सकती तथा इन क्षेत्रों में बाद में भी सिंचाई की आवश्यकता लगभग नही पडती । समय पर बोये चने में पहली सिंचाई बुवाई के 40-50 दिन बाद करें।
सरसों
फसल में पहली सिंचाई फूल आने से पूर्व (बुवाइ के 30 से 40 दिन बाद) तथा दूसरी सिंचाई फूल आने के बाद ( बुवाई के 70 से 80 दिन बाद) करें। यदि एक ही सिंचाई करनी हो तो बुवाई के 45-50 दिन बाद करें।
मसूर
ज्यादातर यह फसल असिंचित स्थिति में बोई जाती है, किन्तु यदि सिंचित भूमि में इसकी बुवाई की गई हो तो बुवाई के 45-50 दिन पर एक सिंचाई करें। आमतौर पर इसमें निराई गुडाई की आवश्यकता नहीं पडती।
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