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माह - मार्च

फ़सल कीट/व्याधि हानि के लक्षण रोकथाम/नियंत्रण
गेहूँ / जौ

 

 

रोली/गेरूआ रोग

पीली एवं भूरी रोली रोग के लक्षणों में पत्तियों/तने/बालियों पर नारंगी/भूरे रंग के धब्बे पड़ जाते हैं जिससे फ़सल को हानि होती है।

यदि रोग प्रतिरोधी क़िस्में नहीं बोई गईं हो तो सुरक्षात्मक दृष्टि से 25 किलो सल्फ़र डस्ट या 2 किलो वीर एम-45 मेंकोजेब को पानी में घोलकर छिड़काव करें.

कण्डवा रोग

अनावृत कण्डवा से बालियों में दाने के स्थान पर काला पाउडर बन जाता है।

रोग ग्रस्त बालियों को पोलीथीन की थैली ढक कर नीचे से बांधकर बालियाँ तोड़ लें ताकि काला पाउडर भूमि पर न गिरे। एकत्र बालियों को जला दें।

चूहे

फ़सल पकते समय चूहों द्धारा पौधों को काटकर हानि पहुँचाई जाती है।

चूहों के आबाद बिलों में 0.5 ग्राम की एल्यूमिनियम फॉस्फाइड की गोलियाँ डालकर बिलों को बंद कर दें अथवा एक भाग जिंक फॉस्फाइड, 2 भाग तेल तथा 47 भाग आटा से विषैली गोलियाँ बना ले तथा प्रत्येक बिल के पास 6 ग्राम विषैली गोलियाँ रखें किन्तु इसके पूर्व 2 दिन तक सादा चुग्गा रखें ताकि चूहे सावधान न हो सकें।

चना

 

फली छेदक कीट

हरे रंग की छोटी इल्लियाँ जो पूर्ण विकसित हो जाने पर 1.5 इंच लम्बी तथा चौथाई इंच मोटी हो जाती है, दानों को खाकर हानि पहुँचाती है।

 एण्डावीर 35 ई.सी. 1.25 लीटर या साइपरवीर 25 ई०सी० 200 मि०लि० या एन.पी.वी.250 एल०ई० 0.5 मि०लि० एण्डोवीर 35 ई०सी० 1.25 मि०लि०/हे. 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़कें।

कुसुम माहू/मोयला कीट

यह कीट पत्तियों कोमल कलियों, फूलों का रस चूसती है, जिससे फ़सल कमज़ोर हो जाती है।

 मिथाइल पेराथियान 2% या मेलाथियान 5% या कार्बारिल 5% चूर्ण का 25 किलो प्रति हेक्टेअर की दर से भुरकाव करें।

मटर छाछ्या/भभूतिया रोग
(पाउडरी मिल्ड्यू)
 

पत्तियों/फलियों पर सफ़ेद रंग का पावडर जम जाने से फ़सल कमज़ोर हो जाती है।

सल्फ़र डस्ट 25 किलो/हेक्टेअर का भुरकाव करें या घुलन युक्त सल्फ़र 2.5 किलो या डायनोकेप 48 ई०सी० 750 मि०लि०/हेक्टेअर का छिड़काव करें।

केला,अंगूर

 

 

फली बीटिल, केला बीटिल पत्तियों के हरे भाग को खुरचकर खाते हैं, जिससे फ़सल खराब होती है। क्यूनालफ़स (क्विनावीर) 25 ई.सी. 1.5 मि.लि. प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़कें।
नीबू

 

तितली की इल्ली पत्तियों को कुतर खाती है पूर्ण विकसित इल्ली काफ़ी बड़ी होती है। एण्डोवीर 35 ई.सी. या क्विनावीर 25 ई.सी. 1.5 मि.लि. या मोनोक्रोटोफ़स (मोनोवीर) 36 एस. एल.1 मि.लि./ली. पानी में घोलकर छिड़कें।
अमरूद

 

मीली बग सफ़ेद रंग की पीठ वाली यह छोटी सी बग नरम टहनियों व फलों पर चिपक कर रस चूसती है। मोनोवीर 36 एस.एल. 1 मि.लि./लीटर पानी में घोलकर छिड़के।
पपीता

 

हरा तैला/विषाणु रोग यह कीट पत्तियों का रस चूसते हैं जिससे पत्तियाँ सिकुड़ जाती हैं डाइमेथोएट 30 ई.सी. या ऑक्सीडिमेटोन मिथाइल 25 ई.सी.1 मि.लि. या फॉस्मोमिडान 85 एस.एल. 0.5 मि.लि. प्रति लीटर पानी में घोल कर छिड़कें।
आम

 

गुच्छा रोग (मालफोरमेशन) पत्तियाँ एवं फूल गुच्छे के रूप में परिवर्तित हो जाने से फल बहुत कम लगते हैं। एन.ए.ए. 1 मि.लि. या कार्बेण्डेजिम 1 ग्राम डाइजिनोन 1 मि.लि. प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़कें।
आम, अंगूर, अमरूद  एन्थ्रेक्नोज़ इस रोग में पत्तियों पर हरे काले रंग के फफोले जैसे उभरे हुये धब्बे पड़ जाने से फ़सल कमज़ोर हो जाती है। मेंकोजेब 2 ग्राम या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 3 ग्राम प्रति लीटर पानी मे घोलकर छिड़कें।
अनार, नीबू पत्ती धब्बा व फल सड़न रोग पत्तियों पर छोटे-छोटे धब्बे पड़ जाते हैं तथा फल सड़ने लगते हैं। थायोफेनेट मिथाइल 70 डब्लू.पी. 1 ग्राम या जाइनेब 2 ग्राम/लीटर पानी में घोलकर छिड़कें।
आम, अंगर, बेर छाछ्या/भभूतिया रोग पौधों के समस्त भागों पर सफ़ेद चूर्ण सा जम जाने पैदावार कम हो जाती है। घुलनयुक्त सल्फ़र 2 ग्राम या डायनोकेप 48 ई.सी. 1 मि.लि. या हेक्साकोनाज़ोल 5% ई.सी. 1.5 मि.लि. प्रति लीटर पानी में छिड़कें।
अंगूर

 

तुलासिता (डाउनी मिल्ड्यू) पत्तियों व कच्चे फलों पर गहरे भूरे रंग के धब्बे बनने से काफ़ी हानि होती है। जाइनेब या मेंकोजेब 2 ग्राम या कॉपर ऑक्सी क्लोराइड 3 ग्राम या मेटालेक्जिल मेंकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में छिड़कें।
नीबू

 

केंकर रोग इससे पत्तियों, टहनियों व फलों पर भूरे रंग के उभरे हुये धब्बे पड़ जाते हैं। कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 3 ग्राम या कार्बेण्डेजिम 1 ग्राम + 250 मि.ग्रा. प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़कें।
पपीता

 

 तना गलन इस रोग के कारण तना भूमि सतह से गल जाने से पौधा गिर जाता है। जल निकास का उचित प्रबन्ध रखें। पानी तने को नहीं छुये। केप्टान 2 ग्राम या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 4.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में धोलकर छिड़कें।

 

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