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माह - जून 

15 जून के आसपास राजस्थान में मॉनसून के आगमन की संभावना रहती है। यदि मॉनसून समय पर आ जाए तो खेतों की जुताई के समय सोयाबीन, मक्का, ज्वार, कपास, बाजरा, मूंगफली, तिल, ख़रीफ़ की अन्य दालें, अरहर, सूरजमुखी आदि की बुवाई करें। बुवाई से पूर्व बीजोपचार अवश्य करें क्योंकि कुछ रोग इस प्रकार के होते हैं जिनकी रोकथाम बीजोपचार से ही संभव है। बीज उपचार से बीज पर लगे हुए कवक/रोगाणु नष्ट होते हैं, भूमि में अन्दर जहाँ बीज गिरता है वहाँ भूमिगत कवक/रोगाणु से रक्षा होती है, अंकुर शीघ्र एवं अच्छा होता है तथा अंकुर मोटा निकलता है। इसी प्रकार जीवाणु कल्चर से भी बीजों को उपचारित करके रासायनिक खाद की बचत की जा सकती है तथा भूमि के अन्दर जीवाणुओं की उपस्थिति से उसकी उर्वरक शक्ति बढ़ जाती है।

फलदार पौधों के लिये गड्ढे व उनका रेखांकन
क्र.सं. फल का नाम गड्ढों का आकार
(मीटर में)
 पौधे से पौधे की दूरी
(मीटर में)
1. नींबू प्रजाति-नींबू 0.90 X 0.90 X 0.90 6 X 6
2 नींबू प्रजाति-मौसमी,संतरा 0.60 X 0.60 X 0.60 8 X 8
3 अनार 0.60 X 0.60 X 0.60 5 X 5
4. अमरूद 0.60 X 0.60 X 0.60 6-7 X 6-7
5 आम 1 X 1 X 1 9 X 9
6 आम-आम्रपाली क़िस्म 1 X 1 X 1 2.5 X 2.5
7 आंवला 1 X 1 X 1 9 X 9
8 बेर 1 X 1 X 1 6-8 X 6-8
फलदार पौधों का बग़ीचा लगाने के लिये रेखांकन कार्य एवं गड्ढा खोदने का कार्य मई माह में सम्पन्न करें, किन्तु यदि किसी कारणवश आप यह कार्य नहीं कर सकें हों तो जून के प्रारम्भ में भी यह कार्य कर निर्धारित दूरी पर बडे़ फलदार पौधों के लिये 1 X 1 X 1 मीटर का गड्ढा तथा मध्यम उंचाई के फलदार पौधों (नींबू) के लिये 90 X 90 X 90 से०मी० तथा छोटे फलदार पौधे जैसे कि अमरूद, अनार, मौसमी, संतरा आदि के लिये 60 X 60 X 60 से०मी० के गड्ढे खोदें। यदि इन गड्ढों को खोदते समय बरसात शुरू हो जाए या/तथा धूप से इन्हें नही तपाया जा सका हो तो प्रत्येक गड्ढे में घास-फूँस डालकर उसे गड्ढे में अन्दर ही जला दें ताकि हानिकारक कवक/रोगाणु आदि नष्ट हो जाए।
पपीता
पपीते के नये बग़ीचे लगाने के लिये इसकी नर्सरी तैयार करें। पौधशाला के लिये उत्तम स्थान का चयन कर मिट्टी को भुरभुरा बना लें। एक हेक्टेअर की पौध तैयार करने के लिये पपीते का 250 ग्राम बीज पर्याप्त होता है। पपीता आप अपनी पंसद की क़िस्म का जैसे, कुर्गहनी ड्यू, मधुबाला, हनीड्यू , पूसा नन्हा, पूसा डिलीशस आदि के बीज का उपयोग करें। बीजों को बुवाई के पूर्व 2 ग्राम केप्टान या थायरम को प्रति किलो बीज में मिलाकर उपचारित करें। बीजों को तैयार क्यारी में 10-10 से०मी० की दूरी पर लाइनों में 2 सें.मी. की दूरी पर 1 से 1.5 से०मी० की गहराई पर बुवाई करके सिंचाई करें।
अनार
अनार के फल जुलाइ-अगस्त में लेने के लिये जून माह में 3 वर्षीय पौधों में 150 ग्राम, चार वर्षीय पौधों में 200 ग्राम, पांच या अधिक वर्षीय पौधों में 250 ग्राम यूरिया प्रति पौधा देकर सिंचाई करें। छोटे पौधों में भी यूरिया इसी माह में दें। एक वर्षीय में 50 ग्राम व दो वर्षीय में 100 ग्राम यूरिया प्रति पौधा देकर सिंचाई करें। वैसे जुलाई-अगस्त में अनार की उपज भी अच्छी होती है तथा बाज़ार भी ठीक रहता है।
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