कृषि समस्याएं और सुझाव

प्रस्तुत प्रश्नोत्तरी किसानो द्वारा पूछे गये प्रश्नों एवं विशेषज्ञों द्वारा दिये गये उत्तरों पर आधारित एक उपयोगी संकलन है । इस प्रश्नोत्तरी में दी गई जानकारी , कृषि एवं कृषि आधारित समस्याओं का समाधान करने में कारगर साबित हो सकती है ।

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कपास

 34. 

 प्रश्न : कपास की एच० एच० 223 व एच० 1117 क़िस्म के बारे में जानकारी दें।

उत्तर :एच० एच० एच० 223 : संकर क़िस्म एच० एच० एच० 223 की सन्‌2002 में हरियाणा में बिजाई के लिए सिफ़ारिश की गई है। इसकी बिजाई का समय 15 अप्रैल से 20 मई तक है। इसके पौधे की ऊँचाई 150-160 से० मी० तथा मुख्य तने पर 2-4 मज़बूत टहनियाँ होती हैं। हालांकि, ऊँचाई तथा टहनियाँ जलवायु पर निर्भर करती हैं। इसके हरे पत्ते, पीले रंग का फूल तथा क्रीम रंग के परागकण होते हैं। यह 175 से 180 दिनों में पककर तैयार होती है। इस पर सूण्डियों का प्रकोप कम होता है तथा यह जैसिड प्रतिरोधी भी है। इस क़िस्म में पत्ती मरोड़ रोग नहीं लगता। इसकी औसत पैदावार 850 कि० ग्रा० प्रति एकड़, रूई 35.2 प्रतिशत तथा रेशे की लम्बाई 22.5 मि० मी० है। इसकी अधिकतम पैदावार 1570 कि० ग्रा० प्रति एकड़ ली जा सकती है।

एच० 1117 : इस क़िस्म की समस्त हरियाणा में अगेती बिजाई (15 अप्रैल से 15 मई तक) करने की सिफ़ारिश वर्ष 2002 में की गई थी। यह क़िस्म 175-185 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है। इसके पत्ते तथा टिण्डे छोटे होते हैं, जो कि अच्छी तरह खिलते हैं। चुनाई आसानी से हो जाती है। इसकी ऊँचाई 150-160 से० मी० होती है। इसमें मज़बूत वानस्पतिक शाखाएँ 2 से 6 तक हो जाती हैं। लेकिन ऊँचाई तथा शाखा जलवायु के कारण कम-ज़्यादा हो सकती हैं। इसके फूल तथा परागकण क्रीम रंग के होते हैं। इस क़िस्म में बहुत ही कम (2 से 5 प्रतिशत) पत्ती मरोड़ रोग लगता है। इसकी औसत पैदावार 1918 कि० ग्रा० प्रति हेक्टेयर तथा रूई की मात्रा 35.5 प्रतिशत और रेशे की लम्बाई 24.1 मि० मी० है। इसकी अधिकतम पैदावार 1480 कि० ग्रा० प्रति एकड़ तक हो सकती है।

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