कृषि समस्याएं और सुझाव

प्रस्तुत प्रश्नोत्तरी किसानो द्वारा पूछे गये प्रश्नों एवं विशेषज्ञों द्वारा दिये गये उत्तरों पर आधारित एक उपयोगी संकलन है । इस प्रश्नोत्तरी में दी गई जानकारी , कृषि एवं कृषि आधारित समस्याओं का समाधान करने में कारगर साबित हो सकती है ।

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औषधीय पौधे

 10. 

 प्रश्न : सफ़ेद मूसली का महत्व व इसकी खेती के बारे में जानकारी दें।

उत्तर : सफ़ेद मूसली एक औषधीय फ़सल है जो लिलियेसी कुल का सदस्य है व वर्षा प्रारम्भ होने पर वृद्धि करता है तथा वर्षा समाप्त होने पर इसके पत्ते व ऊपरी हिस्सा सूख जाता है तथा शीत व ग्रीष्म मौसम में भूमिगत रहकर इसकी आधार की कलियां प्रसुप्त रहती हैं। इसके पौधे गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश के जंगलों में पाये जाते हैं। इसकी देश-विदेश में मांग बढ़ती जा रही है। सफ़ेद मूसली की खेती के लिए गर्म व नमी वाली जलवायु जहाँ पर 800-1500 मि० मी वार्षिक वर्षा हो वे क्षेत्र उपयुक्त हैं। हल्की रेतीली, दोमट, लाल व काली भूमि जिसका पानी का निकास अच्छा हो, इसकी खेती के लिए उत्तम है। अधिक उपजाऊ मिट्‌टी में इसकी अधिक उपज होती है। आर० सी० 1, एम० सी० बी० -405 व एम० सी० बी० 412 इसकी उन्नत क़िस्में हैं। इसकी बीजाई के लिए 4-5 क्विंटल कंद प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है। यह बीज से भी उगाई जा सकती है। परन्तु बीज का जमाव व उपज बहुत कम होती है। इसकी बिजाई जून से जुलाई के महीने में की जा सकती है। रोपाई करते समय लाईन की दूरी 20 से० मी० व डिस्क से डिस्क की दूरी 10 से० मी० तथा गहराई उतनी हो जितनी कि मूल की लम्बाई है। रोपाई करने से पहले कंद को गुच्छों का दो तीन मूल डिस्क के साथ ही अलग कर लेते हैं। रोपने के बाद तुरन्त सिंचाई की आवश्यकता होती है। यदि वर्षा नहीं होती है तो 20-25 दिन बाद सिंचाई करें। बिजाई के 20- 25 दिन के बाद हाथ या खुरपता से खरपतवार निकालें। उसके 20 दिन बाद दुबारा गुडाई करें परन्तु इसकी जड़ों को नुक़सान न हो इसका ध्यान रखें। सफ़ेद मूसली की खुदाई 6-7 महीने के बाद जनवरी व फरवरी में कुदाल से करते हैं। खुदाई से 2 दिन पहले हल्का पानी लगा देना चाहिए जिससे खोदने में आसानी रहती है।

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