कृषि समस्याएं और सुझाव

प्रस्तुत प्रश्नोत्तरी किसानो द्वारा पूछे गये प्रश्नों एवं विशेषज्ञों द्वारा दिये गये उत्तरों पर आधारित एक उपयोगी संकलन है । इस प्रश्नोत्तरी में दी गई जानकारी , कृषि एवं कृषि आधारित समस्याओं का समाधान करने में कारगर साबित हो सकती है ।

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आलू

 11. 

 प्रश्न : मैं हर वर्ष लगभग 8-10 एकड़ क्षेत्र में आलू की खेती करता हूँ तथा पैदावार भी अच्छी मिलती है। परन्तु गत वर्ष मैंने जिन खेतों में आलू की फ़सल बोई थी, उनमें से कुछ खेतों में जगह-जगह पौधो की नई पत्तियों में पहले हल्का पीलापन दिखाई दिया, जो कि बाद में धीरे-धीरे बढ़ता गया। पत्तियाँ किनारे से झुलसने लगी और अन्त में पूरा पौधा ही झुलस गया। इससे आलू की पैदावार पर काफ़ी बुरा प्रभाव पडा और पैदावार बहुत ही कम मिली। इस वर्ष भी लगभग उतने ही क्षेत्र में आलू की फ़सल बोने का विचार है। अतः ऐसी समस्या पुनः न आये, इसका समाधान बतायें।

उत्तर : आलू की फ़सल में इस प्रकार के लक्षण विशेष रुप से मृदा में गंधक तत्व की कमी के कारण आते है। उचित होगा कि आप रासायनिक उर्वरकों के साथ अन्य सूक्ष्म तत्वों का प्रयोग मिट्‌टी की जाँच के बाद उसमें सुझाई गई मात्रा के अनुसार ही करें। यदि मिट्‌टी की जाँच कराना सम्भव न हो सके तो उस स्थिति में गंधक तत्व की पूर्ति हेतु सल्टोन 90 प्रतिशत, जिसमें गन्धक तत्व 90 प्रतिशत दानेदार के रुप में उपलब्ध है, की 8-10 कि० ग्रा० मात्रा प्रति एकड़ बुवाई के समय अन्य उर्वरकों के साथ मिलाकर बेसल ड्रेसिंग के रुप में प्रयोग करें। इससे फ़सल को पूरी अवधि तक गन्धक तत्व उपलब्ध होगा। इससे फ़सल में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होगा, साथ ही अच्छी चमक व गुणवत्ता वाले आलू का अधिक उत्पादन प्राप्त होगा।

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