कृषि समस्याएं और सुझाव

प्रस्तुत प्रश्नोत्तरी किसानो द्वारा पूछे गये प्रश्नों एवं विशेषज्ञों द्वारा दिये गये उत्तरों पर आधारित एक उपयोगी संकलन है । इस प्रश्नोत्तरी में दी गई जानकारी , कृषि एवं कृषि आधारित समस्याओं का समाधान करने में कारगर साबित हो सकती है ।

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मिट्टी, पानी, खाद

 13. 

 प्रश्न : लवणीय-क्षारीय और केवल क्षारीय भूमि के सुधार के तरीक़े बताएँ?

उत्तर :-एक एकड़ खेत को 8 बराबर-बराबर टुकडों में बाँट लें।
- प्रत्येक टुकड़े के चारों ओर 30 से० मी० ऊँची मज़बूत मेंड बनाएँ।
- प्रत्येक टुकड़े को पूरी सावधानी से समतल करें।
- घुलनशील कार्बोनेट की अधिक मात्रा को कम करने के लिए खेत में 20 से० मी० गहरा, अच्छा पानी भरें व रिसने दें।
- बत्तर आने पर भूमि की ऊपरी 10-15 से० मी० परत के लिए सिफ़ारिश के अनुसार जिप्सम (30 मेश) के पावडर को समान रूप से बिखेरें। जिप्सम की सही मात्रा जानने के लिए मिट्‌टी-परीक्षण प्रयोगशाला से मिट्‌टी की जाँच करवाएँ।
- जिप्सम को भूमि की सतह पर बिखेरने के बाद 10 से० मी० गहरी जुताई करें। जिप्सम को इससे अधिक गहरा न मिलाएँ वरना इसकी उपयोगिता घट जाती है।
- जिप्सम डाले गए खेत में अच्छे पानी से 15 से० मी० गहरी सिंचाई करें।
- नाइट्रोजन, फ़ॉस्फ़रस व पोटाश की मात्रा प्रति एकड़ क्रमशः 60, 24 और 24 किलोग्राम खेत में डालें। प्रति एकड़ 20 किलोग्राम ज़िंक सल्फ़ेट भी प्रयोग करना चाहिए। सारा फ़ॉस्फ़ेट, पोटाश और ज़िंक सल्फ़ेट रोपाई से पहले प्रयोग करें जबकि नाइट्रोजन को बाद में थोड़ा-थोड़ा करके यदि पर्याप्त पानी न हो तो धान न लगाएँ। वर्षा ऋतु के आरम्भ में ढैंचा बीजें और सितम्बर में हरी खाद बनाएँ या बीज के लिए रखें। ढैंचे के बाद जौ या गेहूँ की फ़सल ली जा सकती है।
- उपर्युक्त प्रक्रिया अगले वर्ष फिर दोहराएँ लेकिन जिप्सम का प्रयोग न करें।
- धान के बाद खेत में गेहूँ, जौ, चुकन्दर, सैंजी, बरसीम आदि की फ़सल उगाई जा सकती है।

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