कृषि समस्याएं और सुझाव

प्रस्तुत प्रश्नोत्तरी किसानो द्वारा पूछे गये प्रश्नों एवं विशेषज्ञों द्वारा दिये गये उत्तरों पर आधारित एक उपयोगी संकलन है । इस प्रश्नोत्तरी में दी गई जानकारी , कृषि एवं कृषि आधारित समस्याओं का समाधान करने में कारगर साबित हो सकती है ।

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मिट्टी, पानी, खाद

 4. 

 प्रश्न : मृदा परीक्षण के संबन्ध में जानकारी दें।

उत्तर : मिट्टी पोषक तत्वों का भण्डार है तथा पौधों को सीधे खड़ा रहने के लिए सहारा देती है। पौधों को अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए कम से कम 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। ये तत्व हैं : (क) मुख्य तत्व : कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, फ़ॉस्फ़रस, पोटाश, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर (ख) सूक्ष्म तत्व : जस्ता, मैंगनीज, ताम्बा, लौह, बोरोन, मोलिबडेनम व क्लोरीन। पौधों को इन तत्वों की आवश्यकता व उपलब्धता भूमि में मौजूद वातावरण के साथ-साथ फ़सल की क़िस्म, उस स्थान की जलवायु तथा ली जाने वाली उपज पर भी निर्भर करती है। इस सभी तत्वों का सन्तुलित मात्रा में प्रयोग करने से ही उपयुक्त पैदावार ली जा सकती है। यदि किसी भण्डार से केवल निष्कासन ही होता रहे और उसमें निष्कासित मात्रा की पूर्ति न की जाए जो कुछ समय बाद वह भण्डार खाली हो जाता है। ठीक यही दशा हमारे मृदा भण्डार की है। फ़सल उत्पादन में वृद्धि की जाँच से ही पता चलता है कि किन-किन पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए किन-किन उर्वरकों का प्रयोग किया जाना चाहिए। बिना मिट्टी परीक्षण के उर्वरक प्रयोग करना न केवल धन का अपव्यय है बल्कि यह मृदा प्रदूषण को भी बढ़ावा देता है। यदि खाद एवं उर्वरक भूमि में न डाले जाएँ जो इससे फ़सल उत्पादन तथा मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। अब प्रश्न यह उठता है कि किसान अपने खेत में किस पोषक तत्व को फ़सल एवं क़िस्म विषेश के लिए, कितनी मात्रा में डालें। क्या उसके खेत की मिट्टी की गुणवत्ता भरपूर फ़सल उत्पादन, बाग लगाने एवं टिकाऊ खेती के लिए उपयुक्त है अथवा नहीं। इस सभी प्रश्नों का हल मिट्टी की जाँच द्वारा किया जा सकता है।

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