कृषि समस्याएं और सुझाव

प्रस्तुत प्रश्नोत्तरी किसानो द्वारा पूछे गये प्रश्नों एवं विशेषज्ञों द्वारा दिये गये उत्तरों पर आधारित एक उपयोगी संकलन है । इस प्रश्नोत्तरी में दी गई जानकारी , कृषि एवं कृषि आधारित समस्याओं का समाधान करने में कारगर साबित हो सकती है ।

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मिट्टी, पानी, खाद

 3. 

 प्रश्न : मृदा नमूना लेने की विधि की जानकारी दें।

उत्तर : मिट्टी परीक्षण के लिए सबसे पहले मिट्टी का नमूना लिया जाता है। इसके लिए यह ज़रूरी है कि मिट्टी का नमूना पूरे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता हो। यदि मिट्टी का नमूना ठीक ढ़ंग से न लिया गया हो और वह मिट्टी का सही प्रतिनिधित्व न कर रहा हो तो भले ही मिट्टी परीक्षण में कितनी भी सावधानियां क्यों न बरतीं जाए, उसकी सिफ़ारिश सही नहीं हो सकती। अतः खेत की मिट्टी का नमूना पूरी सावधानी से लेना चाहिए।
आवश्यक सामग्री : नमूना लेने के लिए निम्न सामान की आवश्यकता होती है जो किसी भी किसान के पास उपलब्ध होता है। नमूना लेने के लिए सभी सामान साफ़ होने चाहिएँ जिससे मिट्टी दूषित न हो।
1. खुरपी, फावडा, लकडी या प्लास्टिक की खुरचनी।
2. बाल्टी, ट्रे या प्लास्टिक का टब।
3. कपडे एवं प्लास्टिक की थैली।
4. पेन, धागा, मिट्टी, का नमूना सूचना पत्रक।
उर्वरा शक्ति की जाँच हेतु मिट्टी का नमूना लेने की विधिः
1. जिस ज़मीन का नमूना लेने हो, उस पर 10-15 जगहों पर निशान लगा लें।
2. चुनी गई जगह की ऊपरी सतह पर यदि कूडा-करकट या घास इत्यादि हो तो उसे हटा दें।
3. खुरपी या फावडे से 15 से० मी० “वी“(V) के आकार का गड्ढा बनाएँ। इसके एक तरफ से 2-3 से० मी० मोटी परत ऊपर से नीचे तक उतार कर साफ़ बाल्टी या ट्रे में डाल दें। इसी प्रकार शेष चुनी हुई 10-15 जगहों से भी उप नमूने इकट्‌ठा कर लें।
4. अब पूरी मिट्टी को अच्छी तरह हाथ से मिला लें तथा साफ़ कपड़े या टब में डालकर ढेर बना लें। उंगली से इस ढेर को चार बराबर भागों में बाँट दें। आमने-सामने के दो बराबर भागों को हटा दें तथा तथा शेष दो भागों को वापिस अच्छी तरह से मिला लें। यह प्रक्रिया तब तक दोहराए जब तक लगभग आधा किलो मिट्टी रह जाए। इस प्रकार से एकत्र किया गया नमूना पूरे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेगा।
5. नमूने को साफ़ प्लास्टिक की थैली में डाल दें। अगर मिट्टी गीली हो तो इसे छाया में सुखा लें। इस नमूने के साथ नमूना सूचना पत्रक जिसमें किसान का नाम एवं पूरा पता, खेत की पहचान, नमूना लेने की तिथि, ज़मीन का ढ लान, सिंचाई का उपलब्ध स्त्रोत, पानी निकास, अगली ली जाने वाली फ़सल का नाम, पिछले तीन साल की फ़सलों का ब्यौरा एवं कोई अन्य समस्या आदि का विवरण, कपडे की थैली में रखकर इसका मुँह बांधकर कृषि विकास प्रयोगशाला में परीक्षण हेतु भेज दें।
सावधानियां
1. मिट्टी का नमूना इस तरह से लिया जाना चाहिए जिससे वह पूरे खेत की मिट्टी का प्रतिनिधित्व करे। जब एक ही खेत में फ़सल की बढ़ौत्तरी में या ज़मीन के गठन में, रंग व ढलान में अन्तर हो या फ़सल अलग-अलग बोयी जानी हो या प्रबन्ध में अन्तर हो तो हर भाग से अलग-अलग नमूने लेने चाहिएँ। यदि उपरोक्त सभी स्थिति खेत में एक जैसी हो, तब एक ही नमूना लिया जा सकता है। ध्यान रहे कि एक नमूना ज़्यादा से ज्याद एक हैक्टर से लिया जा सकता है।
2. मिट्टी का नमूना खाद के ढेर, पेडों, मेडों, ढलानों व रास्तों के पास से तथा ऐसी जगहों से, जो खेत का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं, से न लें।
3. मिट्टी के नमूने को दुषित न होने दें। इसके लिए साफ़ औजारों से नमूना एकत्र करें तथा साफ़ थैली में डालें। ऐसी थैली काम में न लांए जो खाद एवं अन्य रसायनों के लिए प्रयोग में लाई गई हों।
4. मिट्टी का नमूना बुआई से लगभग एक माह पूर्व कृषि विकास प्रयोगशाला में भेज देना चाहिए जिससे समय पर मिट्टी की जाँच रिपोर्ट मिल जाए एवं उसके अनुसार उर्वरक एवं सुधारकों का उपयोग किया जा सके।
5. यदि खड़ी फ़सल में पोषक तत्वों की कमी के लक्षण दिखाई दें और मिट्टी का नमूना लेना हो तो फ़सल की क़तारों के बीच से मिट्टी का नमूना लेना चाहिए।
6. जिस खेत में कम्पोस्ट, खाद, चूना, जिप्सम तथा अन्य कोई भूमि सुधारक तत्काल डाला गया हो तो उस खेत से नमूना न लें।
7. मिट्टी के नमूने के साथ सूचना पत्रक अवश्य डालें जिस पर साफ़ अक्षरों में नमूना सम्बन्धित सूचना एवं किसान का पूरा पता लिखा हो।

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