कृषि समस्याएं और सुझाव

प्रस्तुत प्रश्नोत्तरी किसानो द्वारा पूछे गये प्रश्नों एवं विशेषज्ञों द्वारा दिये गये उत्तरों पर आधारित एक उपयोगी संकलन है । इस प्रश्नोत्तरी में दी गई जानकारी , कृषि एवं कृषि आधारित समस्याओं का समाधान करने में कारगर साबित हो सकती है ।

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पशुपालन

 10. 

 प्रश्न : पशुओं को मुँह-खुर रोग से कैसे बचायें?

उत्तर : इस रोग से बचाने के लिए स्वस्थ पशुओं को ज़्यादा से ज़्यादा संखया में बचाव का टीका लगवाया जाना चाहिए। यह रोग गाय, भैंस, भेड़, बकरी और सुअर में होता है। प्रारम्भ में मुँह-खुर रोग से पशु को हलका बुखार होता है। प्रभावित पशु के मुँह से लार गिरती है। रोग के दूसरे दिन पशु के मुँह में फफोले निकल आते हैं जो अधिकतर जीभ, मसूडों एवं मुँह के ऊपरी भाग में होते हैं। फफोले शीघ्र ही फूट जाते हैं। पशु चारा खाना छोड़ देते हैं। इस रोग के अन्य लक्षणों में खुरों पर फफोले प्रतीत होते हैं। खुरों पर फफोले होने से पशु में लंगडापन आ जाता है। एक बार रोग हो जाने पर लगभग तीन हफ्‌ते का समय ठीक होने में लगता है। छोटी आयु के बछडे-बछडियां, जिनको टीका न लगा हो, में से 50 प्रतिशत की मृत्यु इस रोग से हो सकती है। इस रोग से पशुओं को बचाने के लिए बोरिक एसिड (15 ग्राम 1 लीटर पानी में) या पोटाशियम परमेंगनेट (1 ग्राम 3 लीटर पानी में) या फिटकरी (15 ग्राम 1 लीटर पानी में) के घोल से दिन में 3-4 बार धोने की सलाह दी है। थनों के लिए सलाह दी गई है कि थन के घाव को पोटाशियम परमेंगनेट के घोल से साफ़ किया जाये।

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