कृषि समस्याएं और सुझाव

प्रस्तुत प्रश्नोत्तरी किसानो द्वारा पूछे गये प्रश्नों एवं विशेषज्ञों द्वारा दिये गये उत्तरों पर आधारित एक उपयोगी संकलन है । इस प्रश्नोत्तरी में दी गई जानकारी , कृषि एवं कृषि आधारित समस्याओं का समाधान करने में कारगर साबित हो सकती है ।

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पशुपालन

 9. 

 प्रश्न : भैंसों में लहू मूतना रोग के कारण, निदान एवं बचाव के बारे में जानकारी दें।

उत्तर : कारण : इस रोग का मुख्य कारण भैंसों के रक्त में फ़ॉस्फ़रस लवण की कमी तथा आक्सीकारक पदार्थों का जमा होना है। इससे लाल रक्त कण कमजोर होकर टूट जाते हैं और घुल कर पेशाब में आने लगते हैं। अत्यधिक गर्मी व सर्दी में यह रोग अधिक देखा जाता है हालांकि यह कभी भी हो सकता है।
लक्षण : पीड़ित भैंसों का मूत्र लाल या भूरे रंग का हो जाता है। प्रारम्भ में पशु चारा खाते रहते हैं परन्तु तीन-चार दिन बाद पशु चारा खाना तथा जुगाली करना बहुत कम कर देते हैं। पशु गोबर करते समय काफ़ी जोर लगाता है। रोग की अंतिम अवस्था में पशु चारा खाना बिल्कुल बंद कर देता है तथा सांस व नाडी काफ़ी तेज चलने लगती है। इलाज न कराने पर खून की कमी होने से पशु कमजोर होकर बैठ जाता है तथा 8-10 दिन में मुत्यृ हो जाती है। गाभिन भैंसों में बच्चा गिर सकता है। उपचार : रोगी पशु को 7.5 ग्राम विटामिन “सी“(एस्कार्बिक एसिड ) की मात्रा 500 मिली० ग्लूकोज (5 प्रतिशत) की बोतल में मिलाकर खून में (इन्ट्रावेनस) दिन में एक बार दी जाती है। यह उपचार तीन या चार दिन करने से रोग ठीक हो जाता है (अधिकतर मामलों में) इसके अतिरिक्त फ़ॉस्फ़रस की कमी दूर करने के लिए पशु को फ़ॉस्फ़रस की अधिक मात्रायुक्त खनिज मिश्रण की मात्रा 10 दिनों तक 100 ग्राम प्रतिदिन तथा बाद में एक महीने तक 50 ग्राम प्रतिदिन मुँह से खिलाना चाहिए। इसके अतिरिक्त बहुत समय से प्रचलित सोडियम एसिड फ़ॉस्फ़ेट का प्रयोग भी इस रोग के उपचार में किया जा सकता है। इस लवण की 80 ग्राम मात्रा मुँह से तथा इतनी ही मात्रा 500 मिली० ग्लूकोज 5 प्रतिशत बोतल में मिलाकर खून में 3-4 दिन तक चढाने (इन्ट्रावेनस) द्वारा भी कई पशु ठीक हो जाते हैं। लेकिन इस उपचार के महंगे पड़ ने तथा मुँह द्वारा लवण खिलाने पर अम्लीय बदहजमी (एसिडिक इनडाइजेशन) हो जाने की सम्भावना के कारण आजकल यह उपचार कम प्रयोग में लाया जाता है।
बचाव के उपाय : 1. पशुओं को अत्यधिक गर्मी व सर्दी से बचाकर रखें,
       2. गर्भावस्था के अन्तिम 2 महीनों में भैंसों को खनिज लवण मिश्रण की 50 ग्राम मात्रा प्रतिदिन खिलाएँ। ब्याने के बाद यह मात्रा 80 ग्राम कर दें तथा कम से कम 20 दिन तक दें,
       3. जिन पशुओं में पहले कभी यह रोग हो चुका हो उनके साथ अधिक सावधानी बरतें।


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