कृषि समस्याएं और सुझाव

प्रस्तुत प्रश्नोत्तरी किसानो द्वारा पूछे गये प्रश्नों एवं विशेषज्ञों द्वारा दिये गये उत्तरों पर आधारित एक उपयोगी संकलन है । इस प्रश्नोत्तरी में दी गई जानकारी , कृषि एवं कृषि आधारित समस्याओं का समाधान करने में कारगर साबित हो सकती है ।

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पशुपालन

 7. 

 प्रश्न : पशुओं में बिमारियों से गर्भपात के कारण, लक्षण व बचाव के उपाय बतायें।

उत्तर : 1. ब्रूसेलोसिस/बैंग रोग : इस रोग में 80 प्रतिशत तक मामलों में गर्भपात हो सकता है (ज़्यादातर पशुओं में एक बार)। इस रोग के बचाव के लिए केवल मादा पशुओं में 3-10 महीने आयु पर टीकाकरण (स्ट्रेन-19 वैक्सीन द्वारा) करें। बाधित पशु अलग रखें। कम स्थान में अधिक पशु न रखें।
2. विब्रियोसिस/केम्पाइलो-बैक्टीरियोसिस : अधिक समस्या नहीं (10 प्रतिशत तक गर्भपात)। इसके बचाव के उपाय के लिए सांडों व गायों में प्रजनन के साढ़े चार महीने पहले पहला टीका तथा 10 दिन पहले दूसरा टीका। बाद में हर साल।
3. लेप्टोस्पाइरोसिस : सामान्यतः कोई लक्षण नहीं। कभी-कभी बुखार, रक्तालपता, थनैला रोग (गर्भपात से पहले या दौरान) गर्भपात प्रतिशत 5 से 40 तक (इक्का दुक्का या बहुत अधिक संखया में) जीवाणु संक्रमित गायों/जंगली पशुओं/शूकरों के मूत्र में पाए जाते हैं (चारा/पानी दूषण द्वारा रोग का फैलाव होता है)। इससे बचाव के लिए संक्रमित पशु अलग रखें। बैक्टीरिन का प्रयोग करें।
4. सैल्मोनेलोसिस : कभी-कभी कोई लक्षण नहीं। कभी-कभी बुखार/ दस्त एकाध पशु में गर्भपात (अधिकतर) कभी-कभी अधिक संखया में पशु बाधित रोग के जीवाणु मल/मूत्र/दूध में स्रावित होते हैं। इस रोग के बचाव के लिए संवाहक पशु अलग कर दें। बैक्टीरियन का प्रयोग करें।
5. एस्परजिलोसिस : जाड़े व बसंत (जनवरी से मार्च तक) से अधिक। सामान्यतः लक्षण (प्रारंभिक) रहित। फफूंद गीले भूसे आदि में पाई जाती है। कम संखया में (5-10 प्रति तक) गर्भपात। गर्भावस्था में फफूंद लगे चारे न खिलाएँ।
6. प्रोटोजोआ जनित रोग : वृद्ध पशुओं में गर्भपात दर अधिक प्रोटोजोआ सांड द्वारा सामान्य प्रजनन प्रक्रिया से मादा पशु में पहुंचते हैं। कृत्रिम गर्भाधान द्वारा रोग का फैलाव नहीं के बराबर । सांड लम्बे समय तक संवाहक बने रहते हैं। बाधित सांड प्रयुक्त न करें।
7. ब्लू टंग रोग : गर्भपात दर अत्यन्त कम/अज्ञात मादा (गाय) में प्रारंभिक लक्षण नहीं वीर्य या कीट जनित संक्रमण, संवाहक अज्ञात/संभावना नहीं, गर्भाशय में संक्रमित बछडा स्थाई रूप से बाधित। कोई उपाय ज्ञात नहीं।
8. बेवाइन वाइरल डायरिया : गर्भपात दर अत्यंत कम, गर्भाशय संक्रमण के बाद भ्रूण विकास दर में कमी। प्रारम्भ में बुखार/जन्मे बछडे मस्तिष्क से कमजोर/विकृत रोग का फैलाव छूत द्वारा। आठ महीने आयु पर टीकाकरण। गर्भावस्था में टीका न लगाएँ।
9. रेड नोज़ रोग : श्वसन/नेत्र झिल्ली रोग के रूप में हो सकता है। कई बार गायों में कोई लक्षण नहीं। रोग फैलाव संक्रमित गायों या अन्य पशुओं द्वारा। 5-60 प्रतिशत तक गर्भपात दर/बाद में पशु रोगरोधी। 6-8 महीने की आयु पर टीकाकरण।

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