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मूली की उत्तम खेती

 

भूमि और जलवायू क़िस्में बीजदर
बुआई का तरीक़ा सिंचाई पौध संरक्षण
खाद और उर्वरक खुदाई  उपज
 
मूली एक महत्वपूर्ण शाकीय फ़सल है जो जड़ तथा हरी पत्तियों दोनों रूपों में प्रयोग की जाती है। शीघ्रता से बढ ने के कारण इसे अन्य सब्जियों की क्यारियों के बीच में सहयोगी अथावा अतः फ़सल के रूप में आसानी से लगाया जा सकता है।
 
भूमि और जलवायू
मूली को सभी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है परन्तु अच्छे परिणाम प्राप्त करने हेतु बलुई दोमट मिट्टी अच्छी होती है। उत्तरी भारत के मैदानी भागों में खरीफ में इसे पछेती फ़सल तथा रबी में शाकीय फ़सल के रूप में उगाया जाता है। इस फ़सल की क़िस्में जलवायु तथा रबी में शाकीय फ़सल के रूप में उगाया जाता है। इस फ़सल की क़िस्में जलवायु सम्बन्धी जरूरतों तापमान में बहुत विशिष्ट होती है। इसलिए किसी विशेष मौसम में कौन सी किस्म का चयन करना अति महत्वपूर्ण है।
 
क़िस्में
छोटी जड़ (शीतोष्ण प्रकार की)
व्हाहट आइसकिल - यह क़िस्म शुद्ध सफेद, छोटी ,पतली तथा हल्की जडें वाली होती है तथा 30 दिन में पककर तैयार हो जाती है। यह सर्दी के मौसम में बुआई के लिए उपयुक्त है।
रैपिड रेड व्हाइट टिप्ड - यह तेजी से बढने वाली लाल-सफेद रंग की मूली है। इसकी जडें छोटी , लाल तथा सफेद रंग की होती है तथा यह 25 दिन से पककर तैयार हो जाती है। घरों अथवा किचिन गार्डन में सर्दी के मौसम में बुआई के लिए उपयुक्त है।
 
लम्बी जड़ों वाली क़िस्में
पूसा देशी इसकी जडे 30 से 35 सें०मी० तक लम्बी होती है तथा, ऊपर का भाग हरा तथा शेष भाग सफेद होता है। तथा यह स्वाद में हल्की तीखी होती हैं व, 50 से 55 दिन में तैयार हो जाती है । यह मध्य अगस्त से सितम्बर तक बुआई के लिए उपयुक्त है।
पूसा रेशमी इसकी जडें 30 से 35 सें०मी० लम्बी होती हैं तथा मूली के ऊपर कर भाग हरा तथा शेष भाग सफेद होता है यह स्वाद में हल्की तीखी होती हैं, परिपक्वता अवधि 50 से 60 दिन होती है।
जापानी सफेद इसकी जडें 30से 40 सें०मी० लम्बी , बिलकुल सफेद, स्वाद में कम तीखी तथा आमतौर पर मोटी होती है। यह अक्टूबर से दिसम्बर तक बुआई के लिए उपयुक्त हाती है तथा 60 से 65 दिनों में तैयार हो जाती है।
पूसा हिमानी इसकी जडें 30 से 35 सें०मी० लम्बी ,होती है तथा मूली का ऊपर का भाग हरा तथा नीचे का भाग सफेद होता है। यह स्वाद में हल्की तीखी तथा 60 से 65 दिन में तैयार हो जाती है। यह दिसम्बर से फरवरी तक बुआई के लिए उपयुक्त है।
पूसा चेतकी इसकी जडें बिल्कुल सफेद, 18 से 20 सें०मी० लम्बी, हल्की तीखी तथा 40 से 45 दिन में हो जाती है। मध्य अप्रैल से अगस्त तक बुआई के लिए उपयुक्त, हालांकि गर्मियों में पैदावार कम होती है। लेकिन बाजार में इस समय फ़सल की कमी के कारण ज्यादा भाव मिलने से इसकी भरपाई हो जाती है।
 
बीज दर
छोटी जड़ वाली क़िस्मों का 10 से 12 कि०ग्रा० तथा लम्बी जड़ वाली किसमों का 8 से 10 कि०ग्रा० प्रति हेक्टेअर होता है।
 
बुआई  का तरीक़ा
सीधी बुआई की अपेक्षा 45 सें०मी० की दूरी पर मेंड पर उथली बुआई करना उपयुक्त रहता है। बीजों के अंकुरण के बाद पौध के बीच फासला 8 से 10 सें मी. रखते हैं तथा बीच के पौधे को निकाल देते हैं। क्यारियों तथा पौधों से पौधे की दूरी किस्म तथा बुआई के मौसम पर निर्भर करता है।
 
सिंचाई
मूली की खेती में बुआई से लेकर मूली के बढ़ने , यहां तक कि उखाड लेने तक पानी की ज्यादा आवश्यकता होती है। गर्मी के मौसम में हर 4 से 6 दिन तथा सर्दी में 8 से 15 दिन सिंचाई करनी चाहिए। फ़सल को खरपतवार से बचाने के लिए कम से कम एक या दो निराई- गुडाई कर देनी चाहिए।
 
खाद और उर्वरक
100 कि०ग्रा० कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट अथवा 50 कि०ग्रा० उत्तम वीर यूरिया , 125 कि०ग्रा० सिंगल सुपर फॉस्फेट तथा 75 कि०ग्रा० म्युरेट आफॅ पौटाश को मेंड़ बनाने से पहले मिट्टी में मिला लेना चाहिए। जब जडें बनाना शुरू हो जाएं तब अन्य 50 कि०ग्रा० युरिया खडी फ़सल में दें।
 
पौध संरक्षण
मूली की फ़सल को मुख्यतः सरसों सॉ फलाई तथा माहू से नुकसान पहुँचाता है।
सरसों मस्टर्ड सॉ फलाइ: इस नाशीजीव की सुंडी से फ़सल में पौधे स्तर पर नुकसान होता है। इनका रंग काला होता है तथा वे पत्तियों पर पलते है।
 
एफिड (मांहू का कीड़ा) : ये छोटे हरे कीट होते हैं। ये पौधे की पत्तियों , फलों , फलों तथा तने से रस चूसते हैं जिससे पौधा कुम्हला जाता है।
 
नियंत्रण के उपाय
इन कीटों के नियन्त्रण के लिए जैसे ही पौध बढने लगे, फ़सल पर 0.05 मिथाइल पाराथोन  का छिड़काव करना चाहिए। यदि आवश्यक हो तो पुनः इसका छिड़काव करें।
 
खुदाई
जब जड़े थोडी मुलायम हों तभी मूली उखाड लेनी चाहिए। खुदाई में कुछ दिनों की देरी करने पर मूली गूदेदार हो जाएगी जो कि खपत हेतु अनुपयुक्त होगी।
 
उपज
छोटी जड़ वाली क़िस्मों से 100 कु० प्रति हेक्टेअर की पैदावार मिलती है जबकि लम्बी जड़ वाली क़िस्मों से 350 कु० प्रति हेक्टेअर  पैदावार प्राप्त होती है।
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