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गाजर की उत्तम खेती

 

उत्तम क़िस्में बीज की मात्रा सिंचाई
खाद और उर्वरक पौध संरक्षण खुदाई एवं पैदावार
 

गाजर एक महत्वपूर्ण जड़वाली सब्जी की फ़सल है जो कि पूरे देश में उगायी जाती है। इसकी जडें पकाकर, सलाद ,अचार संरक्षित एवं मिठाई आदि में प्रयोग होती है। नारंगी रंग वाली क़िस्मों में विटामिन ए , कैरोटीन की मात्रा अधिक होती है।

 

गाजर की खेती

इसकी दोमट भूमि में अच्छी होती है। बुआई के समय खेत की मिट्टी अच्छी तरह भुरभुरी होनी चाहिए जिससे जड़ें अच्छी बनती है। गाजर ठन्डे मौसम की फ़सल है लेकिन एसियाटिक क़िस्में थोडा अधिक तापमान के लिए सहनशील होती है। गाजर में रंग विकास एवं जड़ों की वृद्धि के लिए 20-25 सेल्सियस तापमान अनुकूल होता है।

 

उत्तम क़िस्में

पूसा केसर

यह लाल रंग की उत्तम गाजर की क़िस्म है। पत्तियाँ छोटी एवं जड़ें लम्बी, आकर्षक लाल रंग केन्द्रीय भाग व संकरा होता है। फ़सल 90-110 दिन में तैयार हो जाती है। पैदावार : 300-350 क्विंटल प्रति हेक्टेअर होती है।

पूसा

मेघाली : यह नारंगी गूदे, छोटी टॉप तथा कैरोटीन की अधिक मात्रा वाली संकर प्रजाति है। अगेती बुआई, अगस्त-सितम्बर तक इसकी बुआई अक्ठुबर तक कर सकते हैं। मैदान में बीज उत्पन्न होता है। फ़सल बोने के 100-110 दिन में तैयार हो जाती है पैदावार 250-300 क्विंटल प्रति हेक्टेअर होती है।

पूसा यमदाग्नि

यह प्रजाति आई० ए० आर० आई० के क्षेत्रीय केन्द्र कटराइन द्धारा विकसित की गयी है। इसकी पैदावार 150-200 क्विंटल प्रति हेक्टेअर होती है।

नैन्टस

इस क़िस्म की जडें बेलनाकार नांरगी रंग की होती है। जड़ के अन्दर का केन्द्रीय भाग मुलायम, मीठा और सुवासयुक्त होता है। 110-112 दिन में तैयार होती है। पैदावार 100-125 क्विंटल प्रति हेक्टेअर होती है।

 

 

बीज की मात्रा व बुआई का तरीक़ा

बीज की मात्रा

एक हेक्टेअर क्षेत्र के लिए 6-8 कि०ग्रा० बीज की आवश्यकता पड़ती है।

 

बुआई का समय

मैदानी इलाकों में एशियाई क़िस्मों की बुआई अगस्त से अक्टूबर तक और यूरोपियन क़िस्मों की बुआई अक्टूबर से नवम्बर से करते हैं।

 

बुआई और दूरी

इसकी बुआई या तो छोटी-छोटी समतल क्यारियों में या 30-40 से०मी० की दूरी पर मेंड पर करते हैं।

 

निराई-गुड़ाई व सिंचाई

बुआई के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए। पहली सिंचाई बीज उगने के बाद करें। शुरू में 8-10 दिन के अन्तर पर तथा बाद के 12-15 दिन के अन्तर पर सिंचाई करें।

 

खाद और उर्वरक

एक हेक्टेअर खेत में लगभग 25-30 टन सही गोबर की खाद अन्तिम जुताई के समय तथा 30 कि०ग्रा० नाइट्रोजन तथा 30 कि०ग्रा० पौटाश प्रति हेक्टेअर की दर से बुआई के समय डालें। बुआई के 5-6 सप्ताह बाद 30 कि०ग्रा० नाइट्रोजन को टॉप ड्रेसिंग के रूप मे डालें।

 

पौध संरक्षण

गाजर की फ़सल में कीड़ों का प्रकोप कम होता है। इस पर कीट निंयत्रण की जरूरत नहीं पड़ती है।

 

खुदाई एवं पैदावार

गाजर की जड़ों की खुदाई तब करनी चाहिए जब वे पूरी तरह विकसित हो जाए। खेत में खुदाई के समय पर्याप्त नमी होनी चाहिए। जड़ों की खुदाई फरवरी में करनी चाहिए। बाजार भेजने से पूर्व जड़ों को अच्छी तरह धो लेना चाहिए। इसकी पैदावार क़िस्म पर निर्भर करती है। एसियाटिक क़िस्में अधिक उत्पादन देती है। पूसा क़िस्म की पैदावार लगभग 300-350 क्विंटल प्रति हेक्टेअर, पूसा मेधाली 250-300 क्विंटल प्रति हेक्टेअर जबकि नैन्टिस क़िस्म की पैदावार 100-112 क्विंटल प्रति हेक्टेअर होती है।

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